टाटा संस में बड़ा उलटफेर: नोएल टाटा की असहमति के बावजूद एन चंद्रशेखरन फिर बने चेयरमैन
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टाटा समूह की कमान एक बार फिर एन चंद्रशेखरन के हाथों में होगी। टाटा संस के बोर्ड ने उन्हें अगले 5 साल के लिए दोबारा एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले ने पिछले महीने पद छोड़ने की उनकी घोषणा को पूरी तरह पलट दिया है।

नोएल टाटा ने जताया विरोध गुरुवार को मुंबई में हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के दोबारा कार्यकाल का विरोध किया और इसके खिलाफ मतदान किया। हालांकि, बोर्ड के अधिकांश सदस्यों के समर्थन के कारण यह प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। उल्लेखनीय है कि टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

अगस्त में किया था हटने का ऐलान पिछले महीने अगस्त में चंद्रशेखरन ने घोषणा की थी कि वे 20 फरवरी 2027 को अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद से हट जाएंगे। उन्होंने अपने 40 साल के सफर को आधार बताते हुए नई पीढ़ी को मौका देने की बात कही थी। इस पुनर्नियुक्ति के बाद, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा शुरू की गई चेयरमैन चयन प्रक्रिया अब ठंडे बस्ते में जा सकती है। टाटा समूह की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

आरबीआई के निर्देशों के बीच अहम मोड़ यह घटनाक्रम एक ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (List) कराने का निर्देश दिया है। इस दिशा में कंपनी ने 21,000 करोड़ रुपये का कर्ज भी चुकाया है। जहां नोएल टाटा समूह की लिस्टिंग के सख्त खिलाफ रहे हैं, वहीं शापूरजी पालोनजी समूह इसके पक्ष में है। ऐसे में चंद्रशेखरन की वापसी को समूह में स्थिरता लाने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

कौन हैं एन चंद्रशेखरन? चंद्रा के नाम से मशहूर एन चंद्रशेखरन का करियर एक प्रेरणादायक कहानी है। 1987 में टीसीएस (TCS) में एक इंटर्न के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले चंद्रशेखरन ने 2009 में महज 46 साल की उम्र में कंपनी के सीईओ व एमडी का पद संभाला था।

टाटा समूह का नया युग 2017 में जब टाटा समूह नेतृत्व के संकट से गुजर रहा था, तब उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया। वे पहले गैर-पारसी और गैर-टाटा परिवार के पहले पेशेवर चेयरमैन बने। उनके नेतृत्व में एयर इंडिया की घर वापसी, बिगबास्केट का अधिग्रहण और सेमीकंडक्टर व ईवी क्षेत्र में बड़े निवेश जैसे ऐतिहासिक फैसले लिए गए। अपनी सादगी और सटीक निर्णय क्षमता के कारण वे आज भारतीय उद्योग जगत के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं।

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