रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस से सस्ता तेल खरीदना भारत के लिए अब एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। वॉशिंगटन में रूस पर आर्थिक शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हो गई हैं, जिसके निशाने पर अब भारत और चीन जैसे देश भी आ गए हैं।
अमेरिकी सीनेटर की तीखी चेतावनी अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, आपको अपना रवैया सुधारना होगा। अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदिए। किसी को खुश करने की नीति (Appeasement) कोई कूटनीतिक रणनीति नहीं है। ब्लूमेंथल का मानना है कि रूसी अर्थव्यवस्था पहले ही दबाव में है और ऐसे में इन देशों का सहयोग रूस को जीवनदान दे रहा है।
क्या है नया अमेरिकी विधेयक? अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को मंजूरी दे दी है। इस बिल के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार मिलेगा कि जो देश रूस से तेल और गैस खरीदेंगे, उन पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सके। सीनेट के बाद अब यह बिल अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा।
शैडो फ्लीट और अमेरिका का तर्क अमेरिकी सीनेटर जीन शहीन ने रूसी तेल व्यापार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रूस शैडो फ्लीट (गुप्त जहाजी बेड़े) के जरिए तेल बेच रहा है, जिसका भारत और चीन जैसे देश बड़ा हिस्सा खरीद रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि इन देशों पर आर्थिक दबाव बनाकर ही रूस की ऊर्जा आय को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
भारत का रुख: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि भारत ने हमेशा से यह स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा खरीद उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का हिस्सा है। भारत सरकार का तर्क रहा है कि सस्ती ऊर्जा देश की आर्थिक जरूरतों और आम जनता के हितों से जुड़ी है। भारत किसी भी बाहरी दबाव में अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता करने के पक्ष में नहीं दिखता है।
आगे क्या होगा? अब जब यह बिल कानून बनने की कगार पर है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिकी प्रशासन वास्तव में भारत और चीन जैसे रणनीतिक साझेदारों पर कड़े टैरिफ लागू करता है, या फिर कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने का रास्ता निकाला जाता है। भारत की नजर अब अमेरिकी राष्ट्रपति के अगले कदम पर टिकी है।
🚨Breaking - Democratic Senator Blumenthal warns China and India: “You better clean up your act. Buy your oil and gas somewhere else. Appeasement is not a strategy.”
— Rohit Sharma 🇺🇸🇮🇳 (@DcWalaDesi) September 17, 2026
He tells Putin- “We have your number.” Blumenthal says Putin’s economy is “reeling”. pic.twitter.com/YaoI3GmMdp
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