FATF की तलवार और बेनकाब पाकिस्तान: मसूद अजहर की लोकेशन पर छिड़ी बहस में पाक पत्रकारों की बोलती बंद
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नई दिल्ली। हाल ही में एक टीवी डिबेट के दौरान एफएटीएफ (FATF) की आगामी समीक्षा और पाकिस्तान में छिपे आतंकियों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। जब एंकर ने पाकिस्तानी पैनलिस्टों से मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे आतंकियों के ठिकानों पर सीधा सवाल किया, तो पाकिस्तानी खेमे के पास बचाव का कोई ठोस जवाब नहीं था।

आतंकियों का वजूद नहीं , पाकिस्तानी पत्रकार का अजीब तर्क

डिबेट में पाकिस्तानी पत्रकार राजा फैजल ने यह दावा करने की कोशिश की कि पाकिस्तान में इन आतंकियों का कोई वजूद नहीं है। उन्होंने बेतुका तर्क देते हुए कहा कि अगर ये आतंकी पाकिस्तान में होते, तो अमेरिकी खुफिया एजेंसियां उन्हें पकड़ चुकी होतीं। उन्होंने उल्टा भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि तालिबान के साथ भारत के बेहतर संबंध हैं, इसलिए नई दिल्ली को मसूद अजहर की लोकेशन की ज्यादा जानकारी होनी चाहिए।

इतिहास का आईना और एंकर का करारा प्रहार

पाकिस्तानी पत्रकार की दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए एंकर ने कहा कि आप इतिहास और तथ्यों से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। एंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि अक्टूबर में जब एफएटीएफ की टीम पाकिस्तान पहुंचेगी, तब सारा सच दुनिया के सामने आ जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी हरकतों के लिए हमेशा अमेरिकी मदद पर निर्भर रहा है, जबकि भारत का गौरवशाली इतिहास 5000 साल पुराना है।

भारतीय विशेषज्ञों ने खोले आतंकी ठिकानों के राज

रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल ए.के. सिवाच और कर्नल दानवीर ने पाकिस्तान के दोहरे रवैये की पोल खोल दी। विशेषज्ञों ने कहा:

उजमा करदार की बौखलाहट और सबूतों का अभाव

दूसरी तरफ, पाकिस्तानी पैनलिस्ट उजमा करदार ने जब भारत पर टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को फंडिंग करने का आरोप लगाया, तो एंकर ने उनसे तुरंत सबूत मांगे। उजमा किसी भी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट या दस्तावेजी प्रमाण को पेश करने में पूरी तरह विफल रहीं। एंकर ने उन्हें याद दिलाया कि ब्रिक्स जैसे मंचों पर भी अब चीन और रूस जैसे देश आतंकवाद की निंदा कर रहे हैं, जिससे पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ चुका है।

कौन है मसूद अजहर?

मसूद अजहर, जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी है। 2001 में संसद हमले से लेकर कई बड़ी आतंकी साजिशों में उसकी भूमिका जगजाहिर है। भारत ने इसे सौंपने की मांग कई बार की है, लेकिन पाकिस्तान ने हमेशा सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया का बहाना बनाकर उसे बचाए रखा है। पाकिस्तान की ओर से घोषित 70 लाख का इनाम महज एक दिखावा माना जा रहा है ताकि वह अपनी वैश्विक साख को बचाने का ढोंग कर सके।

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