सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक पुरानी मस्जिद को प्रशासन द्वारा 5 सितंबर 2026 को ढहाए जाने के बाद से ही विवाद गहरा गया है। एक तरफ प्रशासन इसे सरकारी ज़मीन पर बना अवैध निर्माण बता रहा है, तो दूसरी तरफ स्थानीय मुस्लिम समुदाय इसे 100 साल से अधिक पुरानी ऐतिहासिक धरोहर करार दे रहा है।
इस मामले की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई। 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश लोक परिसर अधिनियम के तहत वाद दायर किया गया। 17 जुलाई 2026 को मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध घोषित कर बेदखली का आदेश दिया, जिसे जिला अदालत ने भी 2 सितंबर को बरकरार रखा। इसके बाद आनन-फानन में मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि अदालत का आदेश बेदखली का था, न कि तुरंत ध्वस्तीकरण का। वकील परवेज़ जब्बार और नौशाद अली के अनुसार, नियमानुसार नोटिस के बाद मिलने वाली 30 दिन की अवधि पूरी होने से पहले ही प्रशासन ने कार्रवाई की। मस्जिद के मुतवल्ली का कहना है कि उन्हें अपना धार्मिक सामान और पवित्र पुस्तकें हटाने का भी समय नहीं दिया गया।
मस्जिद गिराए जाने के बाद वहां से बरामद ईंटों पर 1906, 1909 और 1913 जैसे साल अंकित मिले हैं। एएसआई (ASI) के सर्वे में वहां लाइम-सुरखी और लखौरी ईंटों का उपयोग पाया गया है, जो मध्यकाल से लेकर 20वीं सदी की शुरुआत तक की निर्माण शैली रही है। हालांकि, इतिहासकार प्रोफेसर नदीम रिज़वी का मानना है कि सिर्फ ईंटों पर लिखे साल से इमारत की उम्र तय करना मुश्किल है, लेकिन यह पुरानी बनावट की ओर इशारा जरूर करते हैं।
मस्जिद के वकील नौशाद अली का दावा है कि 1955 में यह संपत्ति वक्फ बोर्ड में दर्ज हुई थी। इसके अलावा, 1960 में केंद्र सरकार के पोस्टल विभाग ने यहां दो कमरे किराए पर लेकर डाकखाना चलाया था, जिसके लिए बाकायदा लीज एग्रीमेंट हुआ था। लोगों का सवाल है कि यदि ज़मीन सरकारी थी, तो सरकार ने लीज एग्रीमेंट क्यों किया?
फिलहाल, यह पूरा मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में विचाराधीन है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी दायरे में हुई। वहीं, मस्जिद कमेटी की दलील है कि यह धार्मिक भावना और संपत्ति के अधिकारों का हनन है। हाई कोर्ट ने फिलहाल प्रशासन द्वारा वसूली जाने वाली 6.41 करोड़ रुपये की राशि पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी, जिस पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।
*#WATCH | DIG Saharanpur Abhishek Singh says, There was a mosque here at Saharanpur Collectorate. Court of City Magistrate found it to be illegally built on the Govt land. The appeal of the Mosque Committee was cancelled. The illegal construction is now being demolished...
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) September 5, 2026
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