ब्रिक्स समिट में वेज मेन्यू पर ओवैसी का तीखा हमला, पूछा- क्या यही हमारी विविधता है?
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नई दिल्ली: हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स (BRICS) समिट के दौरान विदेशी मेहमानों के लिए परोसे गए शुद्ध शाकाहारी भोजन ने सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए भारत की विविधता का हवाला दिया है।

सिर्फ शाकाहार ही भारत की पहचान नहीं ओवैसी ने स्पष्ट किया कि भारत की विविधता केवल संस्कृति, धर्म या भाषा तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में खान-पान की आदतें भी पूरी तरह से भिन्न हैं। ओवैसी के अनुसार, देश की विविधता को समझने के लिए अलग-अलग समुदायों की भोजन संबंधी परंपराओं का सम्मान करना अनिवार्य है।

20 फीसदी अल्पसंख्यक शाकाहारी हैं विवाद पर अपनी राय रखते हुए ओवैसी ने कहा कि देश में लगभग 20 फीसदी लोग या अल्पसंख्यक शाकाहारी हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब भारत अपनी विविधता का ढिंढोरा पीटता है, तो उसमें खान-पान की पसंद को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे नहीं जानते कि विदेशी मेहमानों को यह खाना पसंद आया या नहीं, लेकिन एक बहुसांस्कृतिक देश में एक ही तरह का भोजन थोपना सही नहीं है।

चीन के साथ बातचीत पर उठाए सवाल भोजन के अलावा, ओवैसी ने ब्रिक्स समिट के दौरान चीन के साथ हुई बातचीत पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों, विशेषकर डिजिटल करेंसी पर ब्रिक्स में कोई चर्चा नहीं हुई, जो चिंताजनक है।

ओवैसी ने सरकार से यह भी पूछा कि चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर क्या बात हुई। उन्होंने उन इलाकों का जिक्र किया जहां पहले भारतीय सेना पेट्रोलिंग करती थी और अब चीन का कब्जा होने की खबरें हैं। उन्होंने सवाल किया कि उन क्षेत्रों के भविष्य को लेकर सरकार का क्या रुख है।

ईरान-UAE की दोस्ती पर सकारात्मक रुख एक तरफ जहां ओवैसी ने घरेलू और रणनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरा, वहीं उन्होंने ब्रिक्स समिट के दौरान ईरान और यूएई (UAE) के बीच हुई बातचीत को एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इन दोनों देशों का एक साथ बैठकर बातचीत करना वैश्विक शांति के लिए एक अच्छा संकेत है।

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