सऊदी अरब के साथ दोस्ती के बड़े-बड़े दावे करने वाले पाकिस्तान का असली चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है। मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत सुरक्षा का वादा करने वाला पाकिस्तान, यमन के हूती विद्रोहियों का हमला होते ही मैदान छोड़कर पीछे हट गया है।
डिफेंस पैक्ट पर पाकिस्तान का यू-टर्न हाल ही में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट साइन हुआ था। इसके तहत यह तय हुआ था कि तीनों में से किसी एक पर हमला होने पर अन्य दो देश उसकी मदद करेंगे। कुछ दिन पहले ही पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शेखी बघारते हुए कहा था कि अगर सऊदी अरब पर हमला हुआ, तो पाकिस्तान चुप नहीं बैठेगा। लेकिन जैसे ही हूतियों की मिसाइलें सऊदी की ओर बढ़ीं, पाकिस्तान ने तुरंत बयान बदल दिया और कहा कि यह समझौता केवल डिफेंसिव (बचाव) के लिए है।
सऊदी के गुस्से से डरा इस्लामाबाद सऊदी अरब की नाराजगी भांपते ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सक्रिय हो गए। उन्होंने आनन-फानन में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को फोन घुमाया। बातचीत के दौरान शहबाज ने हूती हमलों की निंदा की और सऊदी नेतृत्व के प्रति एकजुटता जाहिर की। विशेषज्ञ इसे केवल डैमेज कंट्रोल मान रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था पूरी तरह सऊदी से मिलने वाली वित्तीय मदद पर टिकी है।
यमन में गहराता मानवीय और कूटनीतिक संकट यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष 2022 के सीजफायर के बाद सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। लाल सागर के महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग बाब अल-मंडेब के पास बढ़ते तनाव ने पूरे वैश्विक व्यापार के लिए खतरा पैदा कर दिया है। विडंबना यह है कि अमेरिका ने भी हूतियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं, जिससे रियाद अपनी सुरक्षा को लेकर गहरे असमंजस में है।
UNGA का मंच और ओबामा-ट्रंप का गणित जानकारों का मानना है कि शहबाज शरीफ की यह जल्दबाजी केवल सुरक्षा चिंताओं के कारण नहीं है। 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक के दौरान शहबाज की मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप से प्रस्तावित है। साथ ही, ट्रंप द्वारा आयोजित डिनर में भी उन्हें निमंत्रण मिला है। पाकिस्तान एक तरफ सऊदी के कर्ज को साधने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के सामने अपनी साख बचाने की जद्दोजहद में जुटा है। हालांकि, हूतियों के डर से मक्का पैक्ट से पीछे हटने के बाद खाड़ी देशों के बीच पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लग गया है।
Telephone Call between the Prime Minister and Saudi Crown Prince His Royal Highness Prince Mohammed bin Salman.
— Prime Minister s Office (@PakPMO) September 13, 2026
Prime Minister Muhammad Shehbaz Sharif held a telephonic conversation with His Royal Highness Prince Mohammed bin Salman bin Abdulaziz Al Saud, Crown Prince & Prime… pic.twitter.com/bHABfUVhBu
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