दिल्ली में BRICS समिट 2026 की शुरुआत हो चुकी है। दुनिया भर के दिग्गज नेता राजधानी में जुट रहे हैं और उनके स्वागत के लिए पूरी दिल्ली को दुल्हन की तरह सजाया गया है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक ऐसा सच है, जो बार-बार बहस का मुद्दा बन रहा है—गरीबी को पर्दों से ढकना।
कुली कैंप: विकास या सिर्फ छलावा? वसंत विहार स्थित कुली कैंप वही जगह है, जिसे 2023 के G20 समिट के दौरान भी इसी तरह के पर्दों से ढक दिया गया था। विदेशी प्रतिनिधियों के रूट पर पड़ने वाली इस बस्ती को पर्दों के पीछे छिपा दिया गया है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के नाम पर लगाए गए ये पर्दे उनके लिए कोई नई बात नहीं हैं।
रोज़ी-रोटी पर पड़ा भारी असर पर्दों के पीछे की जिंदगी उतनी आसान नहीं है जितनी बाहर से दिख रही है। समिट के चलते तीन दिनों के सख्त प्रतिबंधों ने यहाँ के लोगों की कमर तोड़ दी है। दिहाड़ी मजदूरों का काम ठप है, राशन लाना मुश्किल हो गया है और छोटी-मोटी दुकानें बंद पड़ी हैं। सुरक्षा घेरे ने आम आदमी की आवाजाही को पूरी तरह बाधित कर दिया है।
क्या दिल्ली को सुंदर दिखाने का यही तरीका है? बस्ती के कुछ लोग इस व्यवस्था को गलत मानते हैं, तो कुछ इसे शहर की गरिमा का सवाल बताते हैं। कुछ निवासियों का कहना है कि बड़े आयोजन में दिल्ली को व्यवस्थित दिखना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास का असली पैमाना गरीबी को नजरों से ओझल करना है? या फिर उस गरीबी का निवारण करना, जिसे हर बड़े सम्मेलन से पहले तिरपाल से ढका जाता है?
सोशल मीडिया पर GDP ग्रोथ पर तीखे तंज इंटरनेट पर इस मुद्दे ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। लोग 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर का हवाला देते हुए तंज कस रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, 7.8% बढ़ती GDP को पर्दों से इसलिए ढका गया ताकि विदेशी मेहमान यह राज न सीख लें।
अन्य यूजर्स ने भी इसे झूठी शान और नाकामी को छिपाने का प्रयास करार दिया। कई लोगों ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, अगली बार फिर कोई इवेंट होगा तो फिर नया पर्दा लगाया जाएगा, और शहर की चमक बरकरार रहेगी।
महमान लौट जाएंगे, पर्दे हट जाएंगे, लेकिन सवाल बाकी रहेगा BRICS समिट खत्म हो जाएगा, विदेशी मेहमान वापस अपने देश लौट जाएंगे और दिल्ली की सड़कों से ये पर्दे भी उतर जाएंगे। लेकिन कुली कैंप के लोगों के संघर्ष, उनकी बदहाल स्थिति और विकास के इस मॉडल पर उठे सवाल जस के तस बने रहेंगे।
क्या अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में शहर की सुंदरता का अर्थ महज दिखावा है? क्या हम अपनी वास्तविक चुनौतियों को स्वीकार करने के बजाय उन्हें ढंकने की संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं? यह बहस अब एक बड़े नीतिगत सवाल के रूप में सामने आ गई है।
*7.8% बढ़ती हुई GDP को दिल्ली में पर्दों से ढक दिया गया ताकि विदेशों से आने वाले मेहमानों को बढ़ती हुई GDP का राज ना पता चले!
— Mohammedmisbah (@Mohamme68410626) September 11, 2026
वरना ये लोग वापस अपने देश जाकर यही तरीका अपनाएंगे फिर ये लोग हमसे और भी ज्यादा आगे निकल जाएंगे! https://t.co/BUE0SFRkwE pic.twitter.com/H80b3R1y4U
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