रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। 10 सितंबर की रात पुतिन का विमान दिल्ली स्थित हवाई अड्डे पर उतरा, जहां विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहला मौका है जब पुतिन किसी ब्रिक्स समिट के लिए व्यक्तिगत रूप से रूस से बाहर आए हैं।
इस दौरे का मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता है। इस बैठक में भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लग सकती है।
इस बैठक में सबसे बड़ा फोकस रक्षा तकनीक पर है। रूस भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के सबसे आधुनिक फाइटर जेट Su-57 की तकनीक देने और इसे मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनाने का प्रस्ताव दे चुका है। भारत इसके माध्यम से अपनी भविष्य की स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाओं को मजबूती देना चाहता है।
इसके अलावा, ब्रह्मोस-NG (नया और हल्का संस्करण) पर काम तेज करने और मौजूदा S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की बाकी खेप व रखरखाव पर चर्चा होगी। साथ ही, भारतीय वायुसेना के Su-30MKI विमानों को सुपर सुखोई में अपग्रेड करने का खाका भी तैयार है।
डिफेंस के बाद एनर्जी सेक्टर वार्ता का मुख्य केंद्र है। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के बाद अब नए प्लांट लगाने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। दोनों देश छोटे आकार के न्यूक्लियर रिएक्टर्स (SMRs) पर सहयोग बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं, जो कम जगह घेरते हैं और अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।
डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए दोनों देश रुपये और रूबल में लेनदेन को और आसान बनाने पर जोर दे रहे हैं। क्रेमलिन के अनुसार, रूस का लक्ष्य डॉलर को पूरी तरह हटाना नहीं, बल्कि व्यापार के लिए अधिक सरल भुगतान विकल्प सुनिश्चित करना है। ब्रिक्स देशों के साथ रूस का 90 फीसदी व्यापार पहले ही स्थानीय मुद्रा में हो रहा है, जिसे अब भारत के साथ और विस्तार दिया जाएगा।
सामान की आवाजाही को तेज करने के लिए दो प्रमुख गलियारों पर चर्चा संभावित है:
पुतिन की सुरक्षा के लिए रूस ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। उनके साथ उनकी मशहूर बख्तरबंद कार ऑरस सीनेट लिमोजिन और उनका फ्लाइंग क्रेमलिन (IL-96-300PU) विमान आया है, जो एक चलता-फिरता कमांड सेंटर है। दिल्ली में सुरक्षा का जिम्मा रूसी खुफिया एजेंसी FSO और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने साझा तौर पर संभाला है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह मुलाकात भारत-रूस रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के साथ ही भविष्य के रक्षा और व्यापारिक समीकरणों को पूरी तरह बदलने का दम रखती है।
🇷🇺🇮🇳Ceremony marking the official arrival of Russian President Vladimir #Putin in #India to attend the#BRICS Summit. pic.twitter.com/yemWZUGi8Q
— Russia in India 🇷🇺 (@RusEmbIndia) September 10, 2026
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