अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अपनी हालिया रिपोर्ट इंडियाज न्यू इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में 2030 के भारत का खाका खींचा है। फर्म का मानना है कि छह प्रमुख सेक्टर आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल देंगे। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस रिपोर्ट को साझा करते हुए भारत की विकास यात्रा पर भरोसा जताया है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की दहाड़ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिसके पास अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने की क्षमता है। 2020 में निजी कंपनियों के लिए दरवाजे खुलने के बाद अब स्काईरूट, पिक्सेल और अग्निकुल जैसे स्टार्टअप्स तेजी से काम कर रहे हैं। जेफरीज का अनुमान है कि 2030 तक भारत की स्पेस इकोनॉमी 5 गुना बढ़कर 45 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
सेमीकंडक्टर: गेम चेंजर बनेगा इंसेंटिव प्लान भारत अब केवल प्लानिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप फैब और OSAT प्रोजेक्ट्स पर जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। सरकार का 13 अरब डॉलर का इंसेंटिव प्लान चिप डिजाइन और वैल्यू एडिशन को गति दे रहा है। हालांकि ग्लोबल कॉम्पिटिशन एक चुनौती है, लेकिन भारत एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने की राह पर है।
डेटा सेंटर्स में 45 बिलियन डॉलर का निवेश पिछले पांच वर्षों में भारत की डेटा सेंटर क्षमता 5 गुना बढ़कर 2 GW हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पॉलिसी सपोर्ट और बढ़ती मांग के कारण अगले 5 साल में यह क्षमता 10 GW तक जा सकती है। इस सेक्टर में लगभग 45 बिलियन डॉलर का भारी निवेश आने की उम्मीद है।
असेंबलिंग से मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ते कदम भारत की पहचान अब सिर्फ विदेशी पार्ट्स को असेंबल करने वाले देश की नहीं रही। मोबाइल पार्ट्स में घरेलू वैल्यू एडिशन फिलहाल 20% से कम है, जो अगले छह सालों में 50% तक पहुंचने का अनुमान है। यानी अब भारत में ही पार्ट्स का निर्माण और असेंबलिंग हो रही है।
सोलर पावर: एक्सपोर्ट का नया हब भारत पहले ही दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर PV मैन्युफैक्चरर बन चुका है। वर्तमान में 35 GW क्षमता के साथ काम कर रहे भारत में 100 GW की अतिरिक्त क्षमता पर तेजी से काम जारी है। जेफरीज का दावा है कि 2030 तक पूरी सोलर वैल्यू चेन का 90% हिस्सा भारत में ही तैयार होगा।
एयरोस्पेस में भारत की लंबी छलांग इंजीनियरिंग टैलेंट और लागत में फायदे के कारण बोइंग और एयरबस जैसी कंपनियां अब भारत से अरबों डॉलर के पार्ट्स खरीद रही हैं। जब वैश्विक सप्लाई चेन मांग पूरा करने में जूझ रही है, तब भारतीय कंपनियां बड़ी एयरोस्पेस कंपनियों के लिए सबसे भरोसेमंद सप्लायर के रूप में उभर रही हैं।
INDIA. INDUSTRY. GROWTH.
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) September 10, 2026
We are the opportunity for the world 🇮🇳 pic.twitter.com/TJV3PMPY1V
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