कोई बेघर नहीं, विवाद खड़ा करना आदत : उमर अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों और वंदे मातरम विवाद पर तोड़ी चुप्पी
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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के आवास और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवादों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ किया है कि उनकी सरकार नियमों के दायरे में काम कर रही है और बेवजह के विवादों को तूल देना अब एक चलन बन गया है।

कोई कश्मीरी पंडित बेघर नहीं

प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PMRP) के तहत काम करने वाले कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री ने सीधा जवाब दिया। उन्होंने दावों को खारिज करते हुए कहा, कौन सा कश्मीरी पंडित बेघर है? जिन्हें भी आवास की जरूरत थी, उन्हें ट्रांजिट फ्लैट्स आवंटित किए जा चुके हैं।

अब्दुल्ला ने कहा कि बिना ठोस कारण के विरोध प्रदर्शन करना आजकल की आदत बन गई है। उन्होंने प्रभावित कर्मचारियों से अपील की कि वे सीधे आकर अपनी समस्या रखें, क्योंकि सरकार पात्रता के आधार पर पहले ही आवास उपलब्ध करा चुकी है।

वंदे मातरम: प्रोटोकॉल और कांग्रेस की आपत्ति

सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम गाए जाने को लेकर सहयोगी दल कांग्रेस की आपत्ति पर भी सीएम ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने इसे राजनीतिक विचारधारा से ऊपर कानून और संवैधानिक प्रोटोकॉल का हिस्सा बताया।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब संवैधानिक पदों पर बैठे लोग (जैसे एलजी या मुख्य न्यायाधीश) कार्यक्रम में होते हैं, तो राष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस नियमों में बदलाव चाहती है, तो वे संसद का रुख कर सकती है, क्योंकि यह पूरे देश में लागू कानूनी अनिवार्यता है।

पार्टी प्रवक्ता का किया बचाव

शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की पुण्यतिथि पर विधायक तनवीर सादिक के पाजामा वाले बयान पर मचे बवाल पर भी मुख्यमंत्री ने सफाई दी। उन्होंने सादिक का बचाव करते हुए कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया।

अब्दुल्ला ने इतिहासकार वाल्टर लॉरेंस का जिक्र करते हुए कहा कि सादिक का आशय कश्मीर के कठिन अतीत और उस गरीबी को दिखाना था, जिससे निकलकर कश्मीरी आज डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं। उन्होंने माफी मांगने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।

BRICS समिट पर नजर

भारत द्वारा आयोजित होने वाले आगामी BRICS समिट 2026 पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन में रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख देशों के नेताओं का शामिल होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह समिट किस तरह के परिणाम लेकर आता है।

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