उत्तर प्रदेश की सियासत में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर मचे घमासान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। बसपा प्रमुख मायावती ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने भतीजे और उत्तराधिकारी माने जाने वाले आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह आजाद (निष्कासित) कर दिया है। इस घटनाक्रम से प्रदेश की राजनीति में अटकलें तेज हो गई हैं।
अशोक सिद्धार्थ का संन्यास और आकाश की विदाई यह घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब राज्यसभा के पूर्व सदस्य अशोक सिद्धार्थ ने अपने दामाद के राजनीतिक करियर की रक्षा के लिए राजनीति से संन्यास की घोषणा की। इसके कुछ ही समय बाद, मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से निकालने का ऐलान कर दिया। बसपा के इस कदम को पार्टी के भीतर जारी गहरे संकट के रूप में देखा जा रहा है।
सपा ने उठाए बसपा के भविष्य पर सवाल समाजवादी पार्टी ने बसपा की स्थिति पर तंज कसते हुए इसे दुखद बताया है। सपा प्रवक्ता डॉ. आशुतोष वर्मा ने कहा कि विधानसभा चुनाव में महज चंद महीने बचे हैं, लेकिन बसपा अभी भी यह तय नहीं कर पा रही है कि पार्टी में कौन रहेगा और कौन जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांसीराम और भीमराव अंबेडकर के विजन वाली यह पार्टी अब अपनी विचारधारा से भटक गई है और आंतरिक कलह में उलझी हुई है।
आकाश आनंद के लिए सपा के दरवाजे खुले? आकाश आनंद को लेकर सपा का रुख नरम दिखाई दे रहा है। डॉ. आशुतोष वर्मा ने कहा, आकाश आनंद एक युवा और जोशीले नेता हैं, जो बहुजन समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाते हैं। समाजवादी पार्टी उन सभी का स्वागत करती है जो PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) के हितों की वकालत करते हैं।
संजय निषाद का ऑफर: मिशन के लिए आएं साथ आकाश आनंद की निष्कासन के बाद मंत्री संजय निषाद ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला न्योता दिया है। निषाद ने कहा, अंबेडकर और कांसीराम के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए आकाश को आगे आना चाहिए। एक मिशन के लिए समर्पित नेता कभी रिटायर नहीं होता। उन्हें समाज के उन उपेक्षित वर्गों के लिए लड़ना चाहिए जो आज भी हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बहरहाल, मायावती के इस फैसले ने बसपा के भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। क्या आकाश आनंद अब किसी दूसरी पार्टी का दामन थामेंगे, या यह बसपा के लिए एक बड़े बिखराव की शुरुआत है? आने वाले कुछ दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए काफी निर्णायक होने वाले हैं।
#WATCH | Lucknow, Uttar Pradesh | Samajwadi Party Spokeperson Dr Ashutosh Verma says, “The party founded by Kanshi Ram, based on the ideology of Babasaheb Bhimrao Ambedkar, has governed Uttar Pradesh four times. However, the way this party, which was meant to work for the welfare… pic.twitter.com/kJquY1ETyl
— ANI (@ANI) September 10, 2026
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