भारत रत्न सी.एन.आर. राव को नोटिस का सच: चुनाव आयोग ने किया दावों का खंडन, जानें क्या है पूरा मामला
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कर्नाटक में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच भारत रत्न वैज्ञानिक प्रोफेसर सी.एन.आर. राव से जुड़ी एक खबर ने हलचल मचा दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 92 वर्षीय वैज्ञानिक को नाम में विसंगति के कारण चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है और उन्हें सुनवाई के लिए पेश होना होगा।

हालांकि, चुनाव कार्यालय ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

क्या था पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत एक रिपोर्ट से हुई, जिसमें दावा किया गया कि 2002 की मतदाता सूची और मौजूदा रिकॉर्ड में प्रोफेसर राव के नाम में अंतर है। रिपोर्ट में कहा गया कि नाम की स्पेलिंग में Prof की जगह Proff होने के कारण इसे सेल्फ-मिसमैच माना गया और उन्हें नोटिस भेजा गया।

यह खबर इसलिए चर्चा में रही क्योंकि एक वरिष्ठ नागरिक और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक के साथ इस तरह की प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे थे।

चुनाव कार्यालय का स्पष्टीकरण

बेंगलुरु BBMP के अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी (ADEO) ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया कि प्रोफेसर राव या उनके परिवार को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था।

अधिकारियों के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान खुद चुनाव अधिकारियों की एक टीम प्रोफेसर राव के घर गई थी। वहां उन्हें एन्यूमरेशन फॉर्म उपलब्ध कराया गया और मौके पर ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। 8 सितंबर 2026 को सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) ने बिना किसी व्यक्तिगत सुनवाई के उनके नाम को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने की मंजूरी दे दी।

मिसमैच और नोटिस में अंतर

चुनाव कार्यालय ने साफ किया है कि रिकॉर्ड में नाम का अंतर मिलना और नोटिस जारी होना बिल्कुल अलग चीजें हैं। SIR प्रक्रिया में पुराने और नए डेटा का मिलान किया जाता है। यदि कोई विसंगति मिलती है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि मतदाता को परेशान किया जाएगा। प्रोफेसर राव का मामला यह साबित करता है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर भी सत्यापन पूरा किया जा सकता है।

आखिर यह प्रक्रिया क्यों जरूरी है?

कर्नाटक समेत देश के 16 राज्यों में चल रहे SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाना है। इसमें डुप्लीकेट नामों को हटाना और पते या नाम की स्पेलिंग में सुधार करना शामिल है। प्रोफेसर राव का मामला उजागर होने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे, लेकिन स्पष्टीकरण ने यह साफ कर दिया कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाताओं को परेशान करना नहीं, बल्कि डेटा को अपडेट करना है।

फिलहाल, चुनाव कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रोफेसर सी.एन.आर. राव का मामला पूरी तरह सुलझ चुका है और उन्हें किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

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