मुंबई: 25,000 झोपड़ाधारकों के लिए नई उम्मीद, अभय योजना के विस्तार से संवरेगा पुनर्वास का रास्ता
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मुंबई के हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। मुंबई उपनगर के पालक मंत्री आशीष शेलार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अभय योजना का विस्तार करने का निर्देश दिया है। इस कदम से शहर के लगभग 25,000 झोपड़ाधारकों के लिए अपने घर के मालिकाना हक और पुनर्वास का रास्ता साफ हो गया है।

अपात्रता की उलझन से मिलेगी मुक्ति दरअसल, साल 2000 से 2011 के बीच झोपड़ियां खरीदने वाले कई लोग तकनीकी कारणों से पुनर्वास योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे थे। इनमें से बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो एनेक्सचर-2 (Annexure-2) के बाद झोपड़ी के ट्रांसफर के कारण अपात्र घोषित कर दिए गए थे। अब सरकार इन वंचित लोगों को फिर से अवसर देने जा रही है।

क्या है अभय योजना? यह राज्य सरकार, बीएमसी और म्हाडा द्वारा संचालित एक राहत योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य संपत्ति धारकों को कानूनी अड़चनों, बकाया शुल्कों और जुर्माना से मुक्त करना है। इसके तहत बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) वाली पुरानी इमारतों को वैध करने से लेकर, स्टांप शुल्क में छूट देने तक की सुविधाएं शामिल हैं। एसआरए (SRA) के तहत यह योजना झोपड़ावासियों को कानूनी रूप से घर का हस्तांतरण करने में मदद करती है।

मंत्री का कड़ा रुख और निर्देश आशीष शेलार ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 2000 से 2011 के बीच रहने वाले पात्र और अपात्र झोपड़ाधारकों की पात्रता की फिर से समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि जो लोग अब तक प्रशासनिक पेचीदगियों के कारण पुनर्वास से वंचित थे, उन्हें अभय योजना के दायरे में लाकर उनके रुके हुए मामलों को हल किया जाए।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर गरमाई राजनीति एक ओर जहां सरकार इस योजना के विस्तार की बात कर रही है, वहीं विपक्ष ने व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश शर्मा ने आरोप लगाया कि पात्रता होने के बावजूद अधिकारी जानबूझकर लोगों को परेशान करते हैं। उन्होंने दावा किया कि झोपड़ी के हस्तांतरण के लिए घूसखोरी का खेल चल रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार को एक सप्ताह के भीतर दस्तावेजों की जांच कर पात्र लोगों के नाम घर आवंटित करने चाहिए।

पुनर्वास का दीर्घकालिक समाधान इस विस्तार से न केवल उन 25,000 परिवारों को राहत मिलेगी जो एक दशक से अधिक समय से अपने घर के मालिकाना हक का इंतजार कर रहे थे, बल्कि इससे मुंबई में लटकी हुई कई पुनर्वास परियोजनाएं (Redevelopment Projects) भी तेजी से आगे बढ़ सकेंगी। सरकार का यह कदम शहरी गरीबों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।

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