मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब सीधे सैन्य टकराव में बदलती दिख रही है। एक तरफ ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी ड्रोन पकड़ने का दावा किया है, तो दूसरी तरफ जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइलें दागी गई हैं।
जॉर्डन बेस पर 20 बैलिस्टिक मिसाइलों का हमला ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयर बेस अल-अजराक को निशाना बनाया। ईरान ने इसे दंडात्मक अभियान बताते हुए 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने बताया कि उनके डिफेंस सिस्टम ने 18 मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जबकि 2 मिसाइलें खाली इलाकों में गिरीं, जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ।
आतंकी टैंकरों पर अमेरिका की जवाबी कार्रवाई यह हमला अमेरिका की उस सैन्य कार्रवाई के बाद हुआ जिसमें 8 सितंबर को पेंटागन ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई तब की गई जब पिछले 48 घंटों में ईरान ने लगातार अमेरिकी युद्धपोतों को मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी।
रुबियो की दो टूक चेतावनी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। कोलंबिया यात्रा के दौरान उन्होंने कहा, ईरान बार-बार हमारे जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। जब भी वे ऐसा करेंगे, अमेरिका उनके टैंकरों को तबाह करेगा। यह बयान साफ करता है कि अमेरिका अब आक्रामक रुख अपनाने के मूड में है।
अत्याधुनिक Dive-LD ड्रोन पर घमासान ईरान ने दावा किया कि उन्होंने होर्मुज के पास अमेरिका का Dive-LD अंडरवॉटर ड्रोन पकड़ा है। यह ड्रोन 6,000 मीटर की गहराई तक काम करने में सक्षम है। ईरान इसे अपनी बड़ी कामयाबी बता रहा है, लेकिन पेंटागन ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
पेंटागन का क्या है पक्ष? अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि जिसे ईरान पकड़ना बता रहा है, वह एक खराब हो चुका पुराना ड्रोन था, जो तकनीकी खराबी के चलते समुद्र में तैर रहा था। पेंटागन के अनुसार, इसमें कोई गोपनीय या संवेदनशील तकनीक नहीं लगी थी।
इस बीच, ईरान के एक अन्य हिस्से में ईंधन टैंकर में हुए भीषण धमाके से 11 लोगों की मौत की खबर ने क्षेत्र की स्थिति को और अधिक चिंताजनक बना दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच यह छद्म युद्ध अब किस मोड़ पर जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
We just caught one of America’s most mysterious underwater toys:
— Iran in Mumbai (@IRANinMumbai) September 8, 2026
The Dive-LD can operate autonomously for 10 days at depths of up to 6,000 meters.
The autonomous part ends with the machine becoming an involuntary Iranian acquisition.#Iran #Trump #War pic.twitter.com/wh8rLtKAai
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