पंजाब से नाम कटा, दिल्ली में एंट्री: राघव चड्ढा की वोटर लिस्ट शिफ्टिंग पर मचे सियासी संग्राम की इनसाइड स्टोरी
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पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा इन दिनों एक सियासी पहेली के केंद्र में हैं। पंजाब की वोटर लिस्ट से नाम कटने के मात्र 6 दिन के भीतर उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची में दर्ज हो गया है। इस तेजी ने आम आदमी पार्टी (AAP) को हमलावर बना दिया है, जिसने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला? 2 सितंबर को पंजाब चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की, जिसमें राघव चड्ढा का नाम नहीं था। उनके नाम के आगे Permanently Shifted (स्थायी रूप से स्थानांतरित) दर्ज था। लेकिन, हैरानी की बात यह रही कि ठीक 6 दिन बाद यानी 7 सितंबर को उनका नाम दिल्ली के राजिंदर नगर विधानसभा क्षेत्र की अपडेटेड वोटर लिस्ट में शामिल हो गया।

AAP का आरोप: SIR में बीजेपी की दादागिरी आम आदमी पार्टी ने इस बदलाव को लेकर तल्ख तेवर अपनाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर बीजेपी मनमानी कर रही है।

ढांडा ने दावा किया कि 31 अगस्त को दिल्ली के राजेंद्र नगर बूथ की सूची में 746 वोट थे, जिसे बिना किसी वैध प्रक्रिया के राघव चड्ढा के नाम के साथ 767 तक पहुँचा दिया गया। आप का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के नाम पर बीजेपी जिसे चाहे जोड़ रही है और जिसे चाहे हटा रही है।

चुनाव आयोग की सफाई विवाद बढ़ता देख दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने आधिकारिक बयान जारी किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राघव चड्ढा का नाम सामान्य प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया है।

अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में वोटर लिस्ट अपडेट के दौरान कुल 700 फॉर्म-6 को मंजूरी दी गई, जिसमें राघव चड्ढा का आवेदन भी शामिल था। यह नाम किसी विशेष नियम के उल्लंघन में नहीं, बल्कि निर्धारित आवेदनों की श्रृंखला में प्रोसेस किया गया है।

क्या नियम कहता है? चुनाव आयोग के अनुसार, दिल्ली की वोटर लिस्ट 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट के बाद से अपडेट मोड में है। 4 नवंबर को अंतिम सूची जारी होने तक नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 स्वीकार किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि 7 सितंबर तक कुल 25,011 आवेदन मिले हैं और राघव चड्ढा का मामला उसी का हिस्सा है।

फिलहाल, राघव चड्ढा की यह तेज रफ्तार सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां आप इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रही है, वहीं चुनाव आयोग ने इसे पूरी तरह तकनीकी और पारदर्शी प्रक्रिया करार दिया है।

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