तिब्बत और नेपाल की सीमा पर स्थित इलाकों में एक बार फिर भूकंप के झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दिनों ग्लेशियर टूटने की भयावह आपदा झेलने के बाद अब भूकंपीय हलचल ने स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है।
सुबह-सुबह दो बार हिली धरती नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, आज सुबह 5 बजकर 33 मिनट पर तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 मापी गई। राहत की बात यह रही कि इसका केंद्र जमीन से 121 किलोमीटर की गहराई में था।
इस घटना के ठीक दो घंटे बाद, सुबह 7 बजकर 23 मिनट पर एक और झटका महसूस किया गया। हालांकि, इसकी तीव्रता 3.1 दर्ज की गई, जो पहले वाले झटके से काफी कम थी।
भारत के जम्मू-कश्मीर में भी असर भूकंप की यह लहर केवल तिब्बत तक सीमित नहीं रही। भारत के जम्मू-कश्मीर में भी भूकंप की पुष्टि हुई है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.2 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। हालांकि, ये झटके हल्के थे, जिससे किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों में हल्की दहशत जरूर देखी गई।
क्या है खतरे का स्तर? विशेषज्ञों के अनुसार, 3.0 से 4.5 की तीव्रता वाले भूकंप आमतौर पर हल्के माने जाते हैं। इनसे इमारतों में दरारें आने जैसी हल्की घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर तबाही की आशंका कम होती है। फिर भी, बार-बार आ रहे ये झटके पहले से ही प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे नेपाल और तिब्बत के लोगों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
26 अगस्त की तबाही का खौफ आज भी बरकरार यह क्षेत्र हाल ही में 26 अगस्त को एक बड़ी त्रासदी से गुजरा है। तब भोटे कोशी-त्रिशुली नदी घाटी में ग्लेशियर फटने से आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। उस समय आए कंपन को भूकंप समझ लिया गया था, लेकिन बाद में पता चला कि वह भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानों के गिरने का असर था।
उस आपदा में 1200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। यही कारण है कि अब छोटी-सी भी भूकंपीय गतिविधि स्थानीय प्रशासन और जनता को अलर्ट मोड पर ला देती है। फिलहाल, अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
*EQ of M: 4.3, On: 09/09/2026 05:33:09 IST, Lat: 30.804 N, Long: 81.172 E, Depth: 121 Km, Location: Tibet.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) September 9, 2026
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