धुआं-धुआं खार्ग द्वीप: अमेरिका ने तबाह किए ईरान के 5 तेल टैंकर, जवाब में तेहरान ने दागीं 20 मिसाइलें
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तनाव के चरम पर अमेरिका-ईरान मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब सीधे सैन्य टकराव में बदल चुका है। ओमान की खाड़ी और जॉर्डन के सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों ने पूरे क्षेत्र को तनाव की आग में झोंक दिया है।

अमेरिकी युद्धपोत पर हमला और जवाबी कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को पिछले दो दिनों में दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि, अमेरिकी युद्धपोत ने इन हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया।

इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने आक्रामक रुख अपनाते हुए ओमान की खाड़ी में IRGC से जुड़े चार कच्चे तेल के टैंकरों (M/T Kaviz, M/T Charminar, M/T Horizon 1 और M/T Riesco) को नष्ट कर दिया। इसके अलावा, एक अन्य टैंकर M/T Derya को खार्ग द्वीप के पास मिसाइल हमले में तबाह कर दिया गया।

ईरान का पलटवार: जॉर्डन बेस पर 20 मिसाइलें अपने तेल टैंकरों के विनाश से तिलमिलाए ईरान ने चंद घंटों के भीतर ही बड़ा पलटवार किया। तेहरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाते हुए 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। रिपोर्टों के अनुसार, जॉर्डन की रक्षा प्रणाली ने 18 मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जबकि बाकी मिसाइलें बेस के आसपास गिरीं।

ईरान ने दावा किया है कि उसने उन इलाकों को निशाना बनाया है, जहाँ अमेरिकी वायुसेना के F-35, F-16 और F-15 लड़ाकू विमान तैनात हैं।

खतरे में कुवैत-बहरीन के जहाज ईरान ने इस सैन्य संघर्ष को और व्यापक बनाने की चेतावनी दी है। IRGC ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के पास मौजूद तेल टैंकरों को चेतावनी जारी की है कि यदि वे अमेरिकी हितों से जुड़े हैं, तो उन्हें खाली कर दें। ईरान ने धमकी दी है कि इन जहाजों को किसी भी समय निशाना बनाया जा सकता है।

अमेरिका की दो टूक चेतावनी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कोलंबिया में स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अपने नौसैनिक जहाजों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा और भविष्य में भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।

आर्थिक नेटवर्क पर चोट अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि ईरान इन तेल टैंकरों के जरिए अरबों डॉलर का अवैध नेटवर्क चला रहा था। इस नेटवर्क से होने वाली कमाई का इस्तेमाल IRGC और उसके सहयोगी चरमपंथी संगठनों को आर्थिक मदद पहुँचाने के लिए किया जा रहा था, जिस पर अब अमेरिका ने सीधा प्रहार किया है।

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