दुनियाभर के बॉन्ड मार्केट में इस वक्त भारी उथल-पुथल मची है। शेयर बाजार से लेकर करेंसी मार्केट तक, हर जगह डर का माहौल है। इस हलचल के केंद्र में है—जापान। जापानी बॉन्ड यील्ड में अचानक आए उछाल ने बड़े-बड़े निवेशकों और अर्थशास्त्रियों की नींद उड़ा दी है। यह सिर्फ जापान का घरेलू मामला नहीं, बल्कि एक ग्लोबल संकट की आहट है।
दुनिया के बॉन्ड बाजार में एक के बाद एक बिकवाली (Sell-off) दिख रही है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि निवेशक अब सरकारी बॉन्ड से दूर भाग रहे हैं। जापान में 10 साल की फॉरवर्ड यील्ड में 10 बेसिस पॉइंट्स का उछाल देखा गया है, जो सीधे तौर पर अमेरिका, यूरोप और भारत जैसे बाजारों को प्रभावित कर रहा है। जब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बॉन्ड का गणित बिगड़ता है, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है।
2022 में जब बॉन्ड यील्ड बढ़ी थी, तो उसकी मुख्य वजह सेंट्रल बैंकों द्वारा बढ़ाई गई ब्याज दरें थीं। लेकिन आज कहानी बदल चुकी है। अब निवेशक सिर्फ ब्याज दरों को नहीं देख रहे, वे सरकारों के फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) और कर्ज चुकाने की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं। बाजार को अब डर है कि सरकारें जितना कर्ज ले रही हैं, उसे चुकाना भविष्य में मुश्किल होगा। इसी डर के कारण निवेशक अब रिस्क प्रीमियम की मांग कर रहे हैं, जिससे यील्ड तेजी से ऊपर जा रही है।
जापान लंबे समय से भारी-भरकम सरकारी कर्ज के बोझ तले दबा है। जैसे ही वहां लॉन्ग टर्म यील्ड बढ़ी, बाजार ने यह संकेत दे दिया कि जापान के लिए अब कर्ज को मैनेज करना महंगा साबित होगा। जापान के साथ-साथ यूके, फ्रांस और इटली जैसे देशों में भी यही स्थिति है। जिन देशों का कर्ज अनुपात (Debt-to-GDP) ज्यादा है, वहां बॉन्ड मार्केट में सबसे ज्यादा घबराहट है।
भले ही भारत की आर्थिक स्थिति जापान या यूरोप जैसी गंभीर नहीं है, लेकिन ग्लोबल मार्केट के प्रभाव से हम अछूते नहीं रह सकते। जब अमेरिका और विकसित देशों में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों का आकर्षण कम हो जाता है। इससे कैपिटल आउटफ्लो (पैसा बाहर निकलना) बढ़ सकता है और भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का सीधा मतलब है सरकारों के लिए उधार लेना महंगा होना। जब लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो यह बियर स्टीपनिंग जैसा संकेत देती है। यह इस बात का प्रमाण है कि बाजार अगले 10 सालों के लिए महंगाई और आर्थिक अस्थिरता को पहले ही अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है।
संक्षेप में कहें तो, यह सिर्फ बॉन्ड बाजार का डेटा नहीं है, बल्कि दुनिया की सरकारों की फिस्कल पॉलिसी पर लगा एक बड़ा क्वेश्चन मार्क है। निवेशक अब सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं, और सरकारी खजानों की खस्ता हालत ने उन्हें डरा दिया है।
Global bond markets are on fire. Every day yields rise in one place or another. Biggest mover today is Japan, where 10y10y forward (red) is up 10 bps. That spills over to everywhere else and pushes yields up globally. We re witnessing a global sell-off...https://t.co/GRXneqxjUD pic.twitter.com/N9hnEy7GDV
— Robin Brooks (@robin_j_brooks) September 1, 2026
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