वंदे मातरम पर रार: दिल्ली में कांग्रेस को ऐतराज, तो श्रीनगर में अब्दुल्ला परिवार ने दिखाया सम्मान
News Image

श्रीनगर बनाम दिल्ली की सियासत एक तरफ जहां दिल्ली में वंदे मातरम के पूर्ण गायन को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन की सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बिल्कुल अलग नजीर पेश की है। श्रीनगर के पहले फिल्म फेस्टिवल में नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने पूरे राष्ट्रगीत के दौरान सम्मान में खड़े रहकर एक नया संदेश दिया है।

तीन मिनट 10 सेकंड का प्रोटोकॉल नए सरकारी प्रोटोकॉल के तहत वंदे मातरम का पूरा गायन तीन मिनट 10 सेकंड तक चला। इस दौरान अब्दुल्ला परिवार पहली कतार में पूरी गरिमा के साथ खड़ा रहा। इसके बाद बिना किसी हिचकिचाहट के राष्ट्रगान भी गाया गया। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है।

कांग्रेस की ऐतिहासिक उलझन दूसरी ओर, 15 अगस्त को दिल्ली में हुए कार्यक्रम में सोनिया गांधी द्वारा वंदे मातरम को बीच में रुकवाने के बाद विवाद गहराया था। कांग्रेस का तर्क है कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने सांप्रदायिक सौहार्द के लिए केवल शुरुआती दो छंदों को गाने की परंपरा तय की थी। पार्टी इसी तर्क के आधार पर पूर्ण गायन से बचती रही है, जिसे लेकर बीजेपी लगातार उन पर निशाना साध रही है।

सोशल मीडिया पर नया कश्मीर की चर्चा श्रीनगर के इस वीडियो पर पत्रकारों और विश्लेषकों ने तंज कसते हुए कहा है कि जो मुद्दा दिल्ली के लिए बहस का विषय है, उसे कश्मीर ने बड़ी सरलता से सुलझा लिया है। सोशल मीडिया यूजर्स इसे नया कश्मीर की मिसाल बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि राष्ट्रगीत को लेकर विरोधाभास पूरे देश में नहीं, बल्कि केवल कांग्रेस के भीतर है।

बीजेपी का तीखा हमला इस घटना के बाद बीजेपी ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। भाजपा ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि, जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता गर्व से वंदे मातरम गा रहे हैं, तब खुद को मुसलमानों का ठेकेदार बताने वाली कांग्रेस इसका अपमान कर रही है। भाजपा ने कांग्रेस से तीखे सवाल पूछे हैं कि क्या वे कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए देश के स्वाभिमान का सौदा कर रहे हैं?

गठबंधन की वैचारिक दरार? श्रीनगर की इस घटना ने इंडिया गठबंधन के भीतर वैचारिक मतभेदों को फिर से उजागर कर दिया है। के.सी. वेणुगोपाल ने जहां पार्टी के पुराने रुख को दोहराया है, वहीं सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस का व्यवहार कांग्रेस की लाइन से पूरी तरह अलग है। यह विरोधाभास अब गठबंधन के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

15 साल के वैभव का मास्टरमाइंड दांव: DRS पर कप्तान को सलाह देकर पलटा मैच, वीडियो वायरल

Story 1

रील के चक्कर में मौत से सामना: 30 फीट ऊपर से डैम में कूदा युवक, टूटे दोनों पैर

Story 1

अयोध्या में सियासी घमासान: CM योगी के दौरे से पहले सपा सांसद अवधेश प्रसाद का बड़ा हमला, राम मंदिर के चढ़ावे का उठाया मुद्दा

Story 1

रील का भूत पड़ा भारी: हाईवे पर 4 SUV से स्टंटबाजी, ड्रोन से वीडियो बनाना पड़ा महंगा

Story 1

वैभव सूर्यवंशी का स्मार्ट माइंड : ईशान किशन का मान लिया फैसला और फिर हुआ चमत्कार

Story 1

छोटी उम्र, बड़ा दिमाग: वैभव सूर्यवंशी की चालाकी से ईशान किशन ने पलटा मैच का रुख

Story 1

कौशांबी में सनसनी: थाने के गेट पर महिला कांस्टेबल की संदिग्ध मौत, सरकारी राइफल से चली गोली ने खड़े किए कई सवाल

Story 1

पीएम किसान योजना: क्या सालाना 6 हजार के बदले मिलेंगे 10 हजार? जानें सच्चाई

Story 1

Samsung के मिड-बजट फोन्स पर महंगाई की मार, 6,000 रुपये तक बढ़े दाम

Story 1

दिल्ली में मणिपुर के म्यूजिक टीचर की बेरहमी से हत्या: घर के अंदर घुसकर लात-घूंसों से पीटा