यूपी की सियासत में सिंह परिवार की एक और एंट्री? जानिए कौन हैं बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह के चुनावी मैदान में उतरने के संकेत मिल रहे हैं। बुलंदशहर में एक निजी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अगर पार्टी आलाकमान का आदेश हुआ, तो वह चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

कौन हैं शालिनी सिंह? शालिनी सिंह पिछले 15 वर्षों से नोएडा में रहकर सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। वह न केवल भाजपा की सदस्य हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की महिला शाखा राष्ट्र सेविका समिति से भी गहराई से जुड़ी हैं। हाल ही में उन्होंने नागपुर में संघ का सबसे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण (तृतीय वर्ष) पूरा किया है। इसके अलावा, वह एक कवयित्री भी हैं और हाल ही में अपनी किताब के कारण चर्चा में रही हैं।

राजनीतिक विरासत और परिवार शालिनी का पूरा परिवार राजनीति में रंगा हुआ है। पिता बृजभूषण शरण सिंह छह बार सांसद रहे हैं, जबकि मां केतकी देवी सिंह भी लोकसभा सदस्य रह चुकी हैं। उनके भाई प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर से विधायक हैं, और दूसरे भाई करण भूषण सिंह वर्तमान में कैसरगंज से सांसद हैं। शालिनी की शादी भी राजनीतिक घराने में हुई है; उनके पति विशाल सिंह बिहार के पूर्व सांसद अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के बेटे हैं।

नोएडा से चुनाव लड़ने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शालिनी सिंह आगामी चुनावों में नोएडा विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमा सकती हैं। हालांकि, यह सीट पहले से ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह का गढ़ मानी जाती है। ऐसे में शालिनी की उम्मीदवारी भाजपा के लिए एक बड़ा और दिलचस्प सियासी समीकरण पैदा कर सकती है।

अखिलेश यादव पर क्या बोलीं शालिनी? एक इंटरव्यू के दौरान जब शालिनी से सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मर्यादित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उनकी अखिलेश से कभी सीधी मुलाकात नहीं हुई, लेकिन उनके पिता बृजभूषण शरण सिंह अक्सर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के प्रति सम्मान व्यक्त करते रहे हैं। शालिनी ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन वह व्यक्तिगत रूप से अखिलेश का सम्मान करती हैं।

शालिनी सिंह के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल एक सांसद की बेटी की छवि से आगे निकलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाना चाहती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा नेतृत्व उन्हें नोएडा या किसी अन्य सीट से चुनावी मैदान में उतारता है या नहीं।

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