फ्रांस का प्रतिष्ठित एफिल टॉवर सोमवार को एक असामान्य कारण से चर्चा में रहा। कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के चलते स्मारक को बंद करना पड़ा। विवाद की जड़ में है हिंदू धार्मिक संगठन BAPS (Bochasanwasi Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha) का हालिया दौरा, जिसके दौरान महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटाने का आरोप लगा है।
5 सितंबर को BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों के एक समूह ने पेरिस स्थित एफिल टॉवर का निजी दौरा किया। यह दौरा फ्रांस में नए BAPS मंदिर के उद्घाटन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने प्रबंधन से अनुरोध किया था कि दौरे के दौरान उनके साथ आए साधुओं की महिलाओं के साथ बातचीत को यथासंभव सीमित रखा जाए।
कर्मचारियों का आरोप है कि इस अनुरोध को पूरा करने के लिए प्रबंधन ने महिला कर्मचारियों को उनके पोस्ट से हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मियों को तैनात कर दिया। स्टाफ यूनियन की प्रतिनिधि डायने डावोआन ने इसे अपमानजनक बताया। विवाद बढ़ने पर एफिल टॉवर का संचालन करने वाली कंपनी (SETE) ने स्वीकार किया कि उनसे गलती हुई है और ऐसी शर्तें स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थीं, जो उनकी लैंगिक समानता की नीतियों के खिलाफ हैं।
विवाद पर BAPS ने एक आधिकारिक बयान जारी कर माफी मांगी है। संगठन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था। उनके अनुसार, प्रतिनिधिमंडल की संख्या बड़ी थी, इसलिए अन्य पर्यटकों को असुविधा न हो, इसके लिए समय का समन्वय किया गया था। BAPS ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला पर्यटक को एफिल टॉवर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया।
सोशल मीडिया पर कई लोग इस घटना को BAPS के महिला-विरोधी होने से जोड़ रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसे सही संदर्भ में समझने की जरूरत है:
असली विवाद यह नहीं है कि कोई साधु अपनी आस्था के अनुसार क्या करता है, बल्कि यह है कि एक सार्वजनिक संस्थान (SETE) ने उस आस्था को लागू करने के लिए अपने कर्मचारियों के अधिकारों के साथ समझौता क्यों किया?
फ्रांसीसी नेताओं और मंत्रियों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे जांच का विषय बताया है। पूर्व प्रधानमंत्री गैब्रियल अताल और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने साफ किया है कि फ्रांस में कानून और समानता सर्वोपरि है।
फिलहाल पेरिस प्रशासन ने पूरी घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह मामला अब धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के बीच के संतुलन पर एक महत्वपूर्ण बहस बन गया है।
Nous comprenons les préoccupations exprimées et les prenons très au sérieux.
— BAPS Mandir Swaminarayan Hindou de Paris (@BAPSParis) September 7, 2026
Compte tenu de la taille de notre délégation, la visite a été organisée en coordination avec les équipes de la tour Eiffel, au début des horaires habituels d’ouverture, afin de limiter autant que… pic.twitter.com/gyiwzmh6Jv
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