अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को लेकर एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष में जीत के बाद अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें ऐतिहासिक रूप से गिर जाएंगी।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने विश्वास जताया कि युद्ध समाप्त होते ही गैसोलीन की कीमतें तेजी से गिरकर 2 डॉलर प्रति गैलन के स्तर से नीचे आ जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाज़ार प्रभावित हुए हैं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो पिछले छह सप्ताह का उच्चतम स्तर है। पंद्रह दिनों में ही इसमें 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया की 20% तेल आपूर्ति का मार्ग है, इस तनाव का केंद्र बिंदु बना हुआ है। किसी भी बड़े सैन्य टकराव की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
तनाव के बीच, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान की तेल और गैस उत्पादन श्रृंखला काफी विस्तृत है, लेकिन अमेरिकी कंपनियों के पास भी इसी क्षेत्र में समान जोखिम हैं।
गालीबाफ ने कहा, हमारे संसाधनों पर हमला करने का मतलब है कि आप पर भी हमला होगा। हमने यह पहले भी साबित किया है, उन ठिकानों से पूछिए जो अब काम के नहीं रहे।
ईरानी चेतावनी से पहले अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने खुले तौर पर कहा था कि ईरान का तेल टैंकर बेड़ा पूरी तरह असुरक्षित है। उन्होंने धमकी दी कि यदि ईरान ने अमेरिकी जहाजों पर हमला किया, तो वाशिंगटन उनके पूरे तेल टैंकर बेड़े को नष्ट कर देगा।
हाल ही में, अमेरिकी नौसेना ने खार्ग द्वीप और जास्क के पास ईरान के तीन तेल टैंकरों (M/T Downy, M/T Stark 1 और M/T Kylo) को निशाना बनाकर उन्हें बेकार कर दिया था। पेंटागन का कहना है कि ये हमले अमेरिकी युद्धपोतों पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के जवाब में किए गए थे।
दोनों देशों के बीच छिड़े इस ऑयल वॉर ने वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
It’s simple: the oil and gas production chain here is sprawling, accessible, and exposed. American oil and gas companies across these waters and facilities share that exposure. Strike our assets and you get struck. We’ve already proven it. Ask the bases that are no longer viable. https://t.co/XiHAf6KzqV pic.twitter.com/0wBf40K4D3
— محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) September 7, 2026
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