दिल्ली के सत्य निकेतन में ताश के पत्तों की तरह ढही 5 मंजिला इमारत, 6 छात्रों की मौत; CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर
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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही एक पांच मंजिला इमारत देखते ही देखते मलबे के ढेर में बदल गई। इस दुखद हादसे में अब तक 6 छात्रों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर घटना का एक CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें साफ देखा जा सकता है कि इमारत कितनी तेजी से जमींदोज हुई। फुटेज में सड़क किनारे बैठा एक व्यक्ति इमारत को गिरते देख अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर भागता नजर आ रहा है। धूल का गुबार इतना घना था कि कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका उनकी चपेट में आ गया।

लगा जैसे कोई बड़ा धमाका हुआ हो प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरने की आवाज इतनी जोरदार थी कि लोगों को लगा हाल ही में कोई बड़ा धमाका हुआ है। अचानक मची चीख-पुकार और धूल के गुबार के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। देर रात तक मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को निकालने का काम युद्धस्तर पर जारी रहा। स्थानीय लोगों ने भी बचाव दल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मदद की।

इमारत मालिक के खिलाफ FIR, जांच के लिए कमेटी गठित हादसे को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार ने एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। यह कमेटी हादसे के कारणों की पड़ताल करेगी और दोषियों की जवाबदेही तय करेगी। वहीं, दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

NDRF की आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन जिंदगी मलबे में दबे अन्य लोगों की तलाश के लिए NDRF की टीमें अत्याधुनिक उपकरणों के साथ जुटी हैं। ऑपरेशन में लाइफ डिटेक्टर, प्रशिक्षित सर्च डॉग्स और कटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। करीब 70 जवानों की टीम ने मलबे के हर हिस्से को बारीकी से खंगालना शुरू किया है।

जवानों ने दिखाई तत्परता, बचाई जिंदगियां रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जवानों ने बड़ी चुनौती का सामना किया। लाइफ डिटेक्टर से संकेत मिलते ही जवानों ने बिना समय गंवाए डायमंड चेन सॉ, हाइड्रोलिक जैक और कॉम्बी कटर का उपयोग किया। कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने मलबे में फंसे एक अचेत युवक को महज 15 मिनट के भीतर बाहर निकाला। इसके बाद 30 मिनट के भीतर दो और लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। मलबे के अस्थिर हिस्सों को स्थिर रखने के लिए खास इन्फ्लेटेबल बैग्स का सहारा लिया जा रहा है ताकि बचाव कार्य के दौरान कोई अनहोनी न हो।

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