राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत इन दिनों लंदन के दौरे पर हैं। 6 सितंबर को सेलिब्रेशन ऑफ वननेस कार्यक्रम में उन्होंने संघ की विचारधारा को लेकर फैले तमाम भ्रमों को साफ करते हुए कहा कि उनके संगठन का आधार नफरत नहीं, बल्कि शुद्ध सात्विक प्रेम है।
नफरत का कोई स्थान नहीं भागवत ने स्पष्ट किया कि कुछ लोग संघ के काम को नफरत से जोड़कर देखते हैं, जो कि सच्चाई से कोसों दूर है। उन्होंने कहा, बिना किसी स्वार्थ और द्वेष के समाज के प्रति निस्वार्थ आत्मीयता रखना ही संघ का मूल विचार है। इसी प्रेम की शक्ति के दम पर संगठन दशकों से समाज सेवा कर रहा है।
हिंदुत्व की व्यापक परिभाषा हिंदुत्व पर बात करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि इसे किसी एक व्यक्ति या दायरे में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने कहा, हिंदू का मतलब सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार, समाज, समुदाय और पूरी मानवता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू परंपरा में प्रकृति के प्रति केवल पूजा का भाव नहीं, बल्कि गहरा प्रेम और अपनत्व है।
युवाओं पर जताया भरोसा नई पीढ़ी के प्रति अपना नजरिया साझा करते हुए भागवत ने कहा कि युवाओं में दुनिया बदलने का जज्बा बहुत अधिक है। उन्होंने संदेश दिया कि आने वाली पीढ़ी पर विश्वास करना चाहिए। उन्होंने कहा, उन्हें बस मंजिल बताइए, रास्ता उन पर मत थोपिए। वे अपने दम पर सही मूल्यों के साथ लक्ष्य हासिल करने में सक्षम हैं।
विविधता ही एकता का आधार हिंदू राष्ट्र के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए भागवत ने कहा कि इसका मकसद दुनिया को यह बताना है कि विविधता स्वाभाविक है । उन्होंने समझाया, हमें विविधता का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि यह सब एक ही अस्तित्व के अलग-अलग रूप हैं। सबसे तालमेल बिठाकर चलना ही समझदारी है, क्योंकि प्रकृति का नियम भी यही है।
ग्लोबल सिटीजन और निष्ठा का तालमेल लंदन में मौजूद प्रवासी भारतीयों से चर्चा करते हुए भागवत ने एक अहम बात कही। उन्होंने कहा कि अपनी कर्मभूमि (जैसे ब्रिटेन) के प्रति निष्ठावान रहते हुए अपनी मातृभूमि भारत की सेवा करना कोई विरोधाभास नहीं है। यह एक वैश्विक नागरिक (ग्लोबल सिटीजन) के रूप में स्वाभाविक और तार्किक विकास है।
शताब्दी वर्ष का दौरा बता दें कि मोहन भागवत 2 से 7 सितंबर तक लंदन के दौरे पर हैं। संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने वाला है, जिसके उपलक्ष्य में संस्था अपनी वैश्विक पहुंच और वैचारिक संवादों का दायरा बढ़ा रही है। उनका यह दौरा इसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
#WATCH | London, UK | RSS Chief Mohan Bhagwat says, I heard some people say, intense hatred is the basis of our work. It is just the reverse. Shuddha Sadhvik Prem , that is the basis of our work...
— ANI (@ANI) September 6, 2026
(Source: RSS) pic.twitter.com/8kxhQSSbun
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