सहारनपुर मस्जिद विध्वंस: मलबे के नीचे मिला प्राचीन कुआं, सियासी घमासान तेज
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में अवैध निर्माण के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन द्वारा मस्जिद गिराए जाने के बाद मलबा हटाते समय वहां जमीन के नीचे एक प्राचीन कुआं मिला है।

क्या है कुएं का रहस्य? मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, यह कुआं करीब 10 से 15 फीट गहरा है और इसकी गोलाई 4 से 5 फीट है। यह ईंटों से बनी एक प्राचीन संरचना प्रतीत होती है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके की बैरिकेडिंग कर दी है और कुएं के ऊपर लोहे की चादर लगा दी है ताकि मलबा अंदर न गिरे।

ASI करेगा मामले की जांच एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्रवाई अदालत के आदेशों के पालन में की गई थी। अब प्रशासन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की मदद लेगा। तकनीकी टीम यह पता लगाएगी कि यह कुआं कितना पुराना है और इसके ऐतिहासिक साक्ष्य क्या हैं।

इस मामले के शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने मांग की है कि एएसआई द्वारा पूरे परिसर का सर्वे और वीडियोग्राफी कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस जगह का मूल स्वरूप क्या था।

ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर तंज इस घटना ने राज्य की राजनीति गरमा दी है। कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को घेरे में लेते हुए X पर लिखा, अखिलेश जी, सहारनपुर जाकर अवैध इमारत के मलबे के सामने फातिहा पढ़ेंगे? क्या आप मसूद भाई की बातों का समर्थन करेंगे? यूपी पूछ रहा है, बताइए ना?

विपक्ष का तीखा विरोध सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई को दुखद करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जल्दबाजी में कार्रवाई की, जबकि उनके पास कानूनी तौर पर अपील के लिए अभी समय बाकी था। वहीं, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशासन खुद ही गवाह और वकील की भूमिका निभा रहा है।

क्या था पूरा विवाद? सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद का विवाद पिछले डेढ़ साल से चल रहा था। शिकायतकर्ता विकास त्यागी का आरोप था कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर अवैध रूप से मस्जिद बनाई गई है और वहां से किराया भी वसूला जा रहा है।

16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को अवैध मानते हुए 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद शनिवार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर परिसर को खाली करा दिया। मस्जिद पक्ष का दावा था कि यह 150 साल पुरानी संपत्ति है, जिसे कोर्ट में साबित नहीं किया जा सका।

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