सुदिव्य कुमार सोनू का निधन: झामुमो ने खोया अपना संकटमोचक , हेमंत सोरेन बोले- बड़े भाई का साया उठा
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रांची: झारखंड की राजनीति से रविवार सुबह एक बेहद दुखद खबर सामने आई। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को गहरा धक्का लगा है।

अस्पताल में बीता आखिरी समय शनिवार देर रात गिरिडीह स्थित अपने आवास पर सुदिव्य कुमार सोनू को सीने में तेज दर्द उठा। परिजन उन्हें तुरंत गिरिडीह के मर्सी अस्पताल ले गए। चिकित्सक डॉ. शहजाद शेख के अनुसार, अस्पताल पहुंचने पर उनकी स्थिति गंभीर थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ (एस्पिरेशन) हो रही थी। डॉक्टरों ने सीपीआर और हर संभव इलाज का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

मेरे जीवन में रिक्तता छोड़ गए सोनू भैया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। सीएम ने लिखा, सोनू भैया का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। वे मेरे लिए केवल राजनीतिक सहकर्मी नहीं, बल्कि एक बड़े भाई की तरह थे, जो हर कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहते थे। उनका जाना एक ऐसी रिक्तता है जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

सियासी गलियारों में शोक की लहर विपक्ष के नेताओं ने भी सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरा दुख जताया है। भाजपा नेता प्रतुल शाहदेव ने उन्हें याद करते हुए कहा कि विपरीत विचारधारा के बावजूद उनसे हमेशा सार्थक चर्चाएं होती थीं। वहीं, कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने उन्हें मुख्यमंत्री का संकटमोचक बताते हुए कहा कि वे हर मुद्दे को सुलझाने और निष्कर्ष तक पहुंचाने में माहिर थे।

जुझारू नेता का सफर 26 जुलाई 1970 को जन्मे सुदिव्य कुमार सोनू ने 1989 में झामुमो की सदस्यता ली थी। 1992 में ही वे पार्टी के नगर अध्यक्ष नियुक्त कर दिए गए। 2019 और 2024 में गिरिडीह से लगातार जीत हासिल कर उन्होंने अपनी सियासी जमीन मजबूत की थी।

सरकार का अहम चेहरा मंत्री के रूप में वे पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और नगर विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हाल के दिनों में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवादों में भी वे काफी सक्रिय थे। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रहती है कि कल्पना सोरेन को राजनीति में लाने के पीछे उन्होंने ही अहम भूमिका निभाई थी। उनका जाना झारखंड की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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