सुदिव्य कुमार सोनू का निधन: सोरेन परिवार का संकटमोचक और गांडेय का सारथी अब नहीं रहा
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झारखंड की राजनीति के लिए शनिवार की रात एक बड़ा और अपूरणीय झटका लेकर आई। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का देर रात निधन हो गया। उनके निधन से न केवल झामुमो को एक बड़ा नुकसान हुआ है, बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने अपना एक बेहद करीबी और भरोसेमंद साथी खो दिया है।

दुर्गा सोरेन के करीबियों में से एक थे सोनू

सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक यात्रा झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन के परिवार के साथ अटूट रही। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत हेमंत सोरेन के दिवंगत बड़े भाई दुर्गा सोरेन के साथ की थी। वे दुर्गा सोरेन के बेहद करीबी माने जाते थे। 2009 में दुर्गा सोरेन के निधन के बाद, उन्होंने हेमंत सोरेन के साथ कदमताल मिलाया और झामुमो के एक स्तंभ के रूप में उभरे।

कल्पना सोरेन के लिए बने पॉलिटिकल शील्ड

जब 31 जनवरी 2024 को हेमंत सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार किया, तब झामुमो गहरे राजनीतिक संकट में था। उस मुश्किल दौर में कल्पना सोरेन को राजनीति में लॉन्च करने और उन्हें स्थापित करने का श्रेय काफी हद तक सोनू को जाता है। गिरिडीह के गांडेय उपचुनाव में कल्पना सोरेन की जीत के पीछे सोनू की व्यूह रचना सबसे महत्वपूर्ण रही।

साये की तरह साथ रहे सुदिव्य सोनू

गांडेय विधानसभा उपचुनाव से लेकर नवंबर 2024 के मुख्य चुनाव तक, कल्पना सोरेन जब भी क्षेत्र में आती थीं, सुदिव्य सोनू एक साये की तरह उनके साथ मौजूद रहते थे। उन्होंने न केवल गांडेय में भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ मोर्चा संभाला, बल्कि कल्पना की जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव राजनीतिक जद्दोजहद की।

मंत्री पद और सोरेन परिवार का भरोसा

नवंबर 2024 में हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद, सुदिव्य कुमार सोनू को कैबिनेट में जगह मिली। कहा जाता है कि उन्हें मंत्री बनवाने में कल्पना सोरेन की अहम भूमिका थी। जेपीएससी और जेएसएससी छात्रों के आंदोलन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी सोनू ने सरकार के संकटमोचक की भूमिका निभाई थी।

हेमंत सोरेन ने जाहिर किया दुख

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर अपने भावुक संदेश में सोनू को अपना बड़े भाई और वरिष्ठ साथी बताया। उन्होंने कहा कि उनका जाना जीवन में एक ऐसी रिक्तता छोड़ गया है जिसे शब्दों में व्यक्त करना असंभव है। झामुमो के लिए यह एक युग के अंत जैसा है, जिसने न केवल एक कद्दावर नेता खोया है, बल्कि सोरेन परिवार ने अपना सबसे बड़ा रणनीतिकार खो दिया है।

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