झारखंड के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन: हार्ट अटैक से गई जान
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झारखंड सरकार में मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार देर रात निधन हो गया। गिरिडीह स्थित अपने आवास पर अचानक आए दिल के दौरे (हार्ट अटैक) ने राज्य की राजनीति को स्तब्ध कर दिया है।

अस्पताल ले जाने का प्रयास रहा विफल

बताया जा रहा है कि सुदिव्य कुमार सोनू रात को सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा। परिजनों और सहयोगियों ने तुरंत उन्हें गिरिडीह के मरसी हॉस्पिटल पहुँचाया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी। डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची शिफ्ट करने पर भी विचार किया, लेकिन उनकी हालत उन्हें ले जाने की इजाजत नहीं दे रही थी। अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली।

गिरिडीह में शोक की लहर

मंत्री के निधन की खबर मिलते ही गिरिडीह में मातम पसर गया। उनके आवास और अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता, समर्थक और प्रशासनिक अधिकारी जुटने लगे। सोशल मीडिया के माध्यम से झामुमो ने उनके असामयिक निधन को पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।

हेमंत सरकार का प्रमुख चेहरा

सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए थे। हेमंत सोरेन की कैबिनेट में उन्हें कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी, जिनमें नगर विकास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद के अलावा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे अहम मंत्रालय शामिल थे।

सरकार और संगठन के बीच सेतु

सोनू को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बेहद करीबी माना जाता था। हाल ही में राज्य में चल रहे JPSC-JSSC विवाद के दौरान उन्होंने सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी सक्रियता और मुद्दों को सुलझाने की क्षमता उन्हें सरकार का एक भरोसेमंद चेहरा बनाती थी।

हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे और बचाव

चिकित्सकों का मानना है कि हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की धमनियों में रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इसके मुख्य कारणों में जीवनशैली, खानपान और तनाव शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सीने में तेज दबाव, सांस फूलना, अचानक पसीना आना या जबड़े में दर्द जैसे लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और तनाव मुक्त दिनचर्या ही ऐसे हादसों से बचने का एकमात्र उपाय है। लक्षण महसूस होने पर घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जीवन बचा सकता है।

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