कोर्ट रूम में इंतजार करते रहे वकील और जज के घर से हो गया फैसला? स्वतंत्र भारद्वाज केस में मचा बवाल
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जंतर-मंतर पर कथित हमले के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद मामले ने एक नया और विवादित मोड़ ले लिया है। शनिवार को आरोपी को पुलिस कस्टडी में भेजे जाने की प्रक्रिया को लेकर पीड़ित पक्ष के वकील ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे कानूनी हलकों में चर्चा छिड़ गई है।

क्या है स्वतंत्र भारद्वाज विवाद?

यह मामला जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान नाबालिग एक्टिविस्ट निशू आजाद के पिता के साथ मारपीट की गई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम मुख्य रूप से सामने आया। विवाद तब बढ़ा जब एक इंटरव्यू में भारद्वाज ने कथित तौर पर निशू के पिता के सिर पर हमला करने की बात स्वीकार की। हालांकि, बाद में उन्होंने इसे सेल्फ डिफेंस करार दिया।

गिरफ्तारी और FIR में फेरबदल

शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने बुलंदशहर से भारद्वाज को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के पीछे संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर हुआ जोरदार प्रदर्शन एक बड़ी वजह था। खबरों के मुताबिक, FIR में SC-ST एक्ट की धाराएं और आपराधिक धमकी के साथ-साथ एक POCSO केस भी जोड़ा गया है। इससे पहले पुलिस ने चोटों को सिंपल बताया था।

कोर्ट रूम के बजाय जज के आवास पर सुनवाई

शनिवार को जब मामले की सुनवाई होनी थी, तो पीड़ित पक्ष के वकील ऋषव रंजन कोर्ट रूम में मौजूद थे। लेकिन, उन्हें तब झटका लगा जब पता चला कि आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बजाय जज के आवास पर पेश किया गया। वकील का आरोप है कि आरोपी के वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े और सुनवाई पूरी कर ली गई।

क्या छिपाया जा रहा है?

वकील ऋषव रंजन ने इस पूरी प्रक्रिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, हम कोर्ट में इंतजार करते रहे और फैसला जज के घर से हो गया। इतने गंभीर अपराध में महज एक दिन की पुलिस रिमांड समझ से परे है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने अब तक FIR में जोड़ी गई नई धाराओं को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

इस घटनाक्रम ने न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस की अगली पूछताछ में क्या नया खुलासा होता है और क्या पीड़ित पक्ष को न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता का भरोसा मिल पाएगा।

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