FBI की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल मंजीत सिंह बेदी पंजाब से गिरफ्तार, 1.42 करोड़ का था इनाम
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अमेरिकी सरकार को करोड़ों का चूना लगाने वाले जालंधर के निवासी मंजीत सिंह बेदी को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बेदी का नाम अमेरिका की खुफिया एजेंसी FBI की मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स की लिस्ट में शामिल था। उस पर गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने के लिए 1.42 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

क्या है पूरा मामला? मंजीत सिंह बेदी मूल रूप से पंजाब का रहने वाला है और अमेरिका के वाशिंगटन स्थित टैकोमा शहर में एशियन ग्रोसरी स्टोर चलाता था। बेदी पर अमेरिकी सरकार के सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम (SNAP) में बड़े पैमाने पर हेराफेरी करने का आरोप है। यह कार्यक्रम अमेरिका में गरीब परिवारों को राशन के लिए आर्थिक सहायता देता है।

धोखाधड़ी का स्मार्ट तरीका आरोपों के मुताबिक, बेदी ने अपनी दुकान को धोखाधड़ी का अड्डा बना लिया था। वह SNAP के लाभार्थियों के EBT कार्ड और पिन कोड ले लेता था। वह दुकान के पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) टर्मिनल का इस्तेमाल कर फर्जी ट्रांजेक्शन दिखाता था, जैसे कि उसने कोई सामान बेचा हो।

वह लाभार्थियों को सरकारी सहायता राशि का आधा हिस्सा नकद दे देता था और बाकी 50 फीसदी राशि खुद अपनी जेब में रख लेता था। इस तरह उसने मार्च 2024 से जून 2025 के बीच अमेरिकी सरकार को करीब 5.7 करोड़ रुपये ($600,000) का नुकसान पहुंचाया।

क्यों लगा वायर फ्रॉड का गंभीर आरोप? अमेरिकी कानूनों के तहत बेदी पर वायर फ्रॉड की धाराएं भी लगाई गई हैं। चूंकि EBT कार्ड स्वाइप करने पर बैंक ट्रांजेक्शन की मंजूरी के लिए राज्यों की सीमाओं के पार इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल भेजे जाते थे, इसलिए इसे गंभीर वित्तीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

कैसे भारत भाग निकला आरोपी? अप्रैल 2026 में जब अदालत ने उस पर आरोप तय किए, तो उसे पासपोर्ट जमा करने और शहर न छोड़ने की शर्त पर जमानत दी गई थी। हालांकि, उसने शर्तों का उल्लंघन किया और सड़क मार्ग से कनाडा होते हुए भारत भाग आया। इसके बाद मई 2026 में उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।

भारत में क्यों हुआ गिरफ्तार? FBI की मोस्ट वांटेड सूची में नाम आने के कुछ ही घंटों के भीतर पंजाब पुलिस ने उसे जालंधर से दबोच लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि बेदी पर भारत में भी कई गंभीर मामले दर्ज हैं। उस पर पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल्स रेगुलेशन एक्ट के साथ-साथ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात (BNS) की धाराओं में मामला दर्ज है। फिलहाल, भारतीय पुलिस यह जांच कर रही है कि भारत में उसने किन-किन अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया है।

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