झारखंड में कानून-व्यवस्था पर गरमाई सियासत: सीता सोरेन ने हेमंत सरकार को घेरा, छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग
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झारखंड में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ हो रहे आंदोलनों ने प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है। भाजपा नेत्री सीता सोरेन ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर सीधा निशाना साधा है।

असुरक्षित होती बहन-बेटियां सीता सोरेन ने हजारीबाग के कटकमदाग में एक आदिवासी महिला के साथ हुए दुष्कर्म और बर्बरता की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि महिला का पैर तोड़ देने की घटना रूह कंपा देने वाली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि खुद को आदिवासी हितैषी बताने वाली सरकार के राज में बहन-बेटियां अपने ही घरों में असुरक्षित हैं और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

फास्ट ट्रैक कोर्ट से सजा की मांग हजारीबाग के साथ-साथ धनबाद में हाल ही में हुए सामूहिक दुष्कर्म का जिक्र करते हुए उन्होंने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। सीता सोरेन ने स्पष्ट किया कि दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए फांसी की सजा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पीड़िता को तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा और पर्याप्त मुआवजे की भी मांग की है।

आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में उतरीं भाभी सीता सोरेन ने केवल महिला सुरक्षा ही नहीं, बल्कि JPSC और JSSC-CGL परीक्षाओं में सुधार की मांग कर रहे छात्रों का भी खुलकर पक्ष लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उन सभी युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का आग्रह किया है, जो अपनी भर्तियों में पारदर्शिता की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे।

लोकतांत्रिक अधिकार का हवाला उन्होंने पत्र में जोर देकर कहा कि अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना युवाओं का लोकतांत्रिक अधिकार है। आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों से उनके भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि सरकारी नौकरी के सत्यापन (Verification) के दौरान उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना होगा।

संवेदनशील निर्णय की अपील सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील निर्णय लें। उन्होंने कहा कि ये युवा मध्यम और गरीब परिवारों से आते हैं, जिनका मकसद कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं, बल्कि अपने रोजगार और भविष्य के लिए सरकार का ध्यान आकृष्ट करना था। ऐसे होनहारों पर मुकदमा चलाना अन्यायपूर्ण है।

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