7 महीने से भारतीय जेल में कैद 6 यूक्रेनी नागरिक: आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों खारिज हुई याचिका?
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दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 यूक्रेनी नागरिकों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने जेल में रहते हुए अपने परिजनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (ई-मुलाकात) के जरिए बातचीत करने की अनुमति मांगी थी। ये विदेशी नागरिक पिछले 7 महीनों से भारतीय जेलों में बंद हैं।

हाईकोर्ट ने क्यों ठुकराई मांग?

आरोपियों ने 26 दिसंबर 2022 के उस सरकारी सर्कुलर को चुनौती दी थी, जो विदेशी कैदियों को वीडियो कॉल की अनुमति नहीं देता। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन बताया। हालांकि, जस्टिस नवीन चावला की बेंच ने याचिका खारिज कर दी और अब इस मामले पर अगली सुनवाई 21 सितंबर को तय की गई है।

इससे पहले, कोर्ट ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया था जिसमें इन आरोपियों के खिलाफ जांच की अवधि को 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।

कौन हैं ये आरोपी और मामला क्या है?

बीते साल 13 मार्च को भारतीय पुलिस ने 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को अलग-अलग एयरपोर्ट्स से गिरफ्तार किया था। इन पर म्यांमार में अवैध रूप से घुसने, वहां के जातीय विद्रोही समूहों को सैन्य प्रशिक्षण देने और ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराने का गंभीर आरोप है।

NIA के अनुसार, ये सभी लोग वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन फिर मिजोरम के संरक्षित इलाकों (Protected Areas) में बिना अनुमति दाखिल हुए। इसके बाद वे म्यांमार जाकर वहां की सैन्य सरकार के खिलाफ लड़ रहे सशस्त्र समूहों के साथ सक्रिय हो गए।

किन कानूनों के तहत फंसा पेंच?

इन विदेशी नागरिकों पर भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में कड़े कानून लगाए गए हैं:

विदेशी संदिग्धों का बैकग्राउंड

गिरफ्तार किए गए लोगों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक भी शामिल है, जो सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल नाम की फर्म चलाते हैं। उनकी वेबसाइट के अनुसार, वे इराक और लीबिया के युद्धों में शामिल रहे हैं और खुद को सुरक्षा सलाहकार बताते हैं।

NIA का दावा है कि ये लोग केवल सलाहकार नहीं, बल्कि म्यांमार के विद्रोही गुटों को ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग दे रहे थे। चूंकि म्यांमार के चिन राज्य से सटे भारतीय राज्यों (मिजोरम/मणिपुर) में विद्रोही गुट सक्रिय हैं, इसलिए इनका भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में घूमना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है।

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