4 सितंबर 2026 की तड़के 2:55 बजे, जब पूरा देश नींद में था, आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में इसरो (ISRO) के 16,500 वैज्ञानिकों की सांसें अटकी हुई थीं। पिछले कुछ समय से भारतीय लॉन्च क्षमताओं पर उठ रहे सवालों के बीच GSLV-F17 का प्रक्षेपण एक बड़ी परीक्षा था। लेकिन, 19 मिनट बाद सुबह 3:14 बजे कंट्रोल रूम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
इस मिशन की सफलता के साथ ही भारत ने अपना पहला एडवांस्ड इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05 सफलतापूर्वक जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में धकेल दिया है। यह सैटेलाइट विजिबल, इंफ्रारेड और मल्टी-स्पेक्ट्रल बैंड्स के जरिए धरती की हाई-क्वालिटी तस्वीरें भेजने में सक्षम है।
जीएसएलवी (GSLV) को अक्सर नॉटी बॉय कहकर पुकारा जाता रहा है, क्योंकि अपने शुरुआती दौर में इसे कई तकनीकी नाकामियों का सामना करना पड़ा था। क्रायोजेनिक इंजन तकनीक को लेकर जब अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा, तो भारत ने विदेशी मदद के बजाय खुद इसे विकसित करने का साहसी फैसला लिया। आज की सफलता उसी पुरानी जिद्द और मेहनत का परिणाम है।
EOS-05 की कामयाबी ने 2021 के असफल GISAT-1 मिशन की कड़वी यादों को पीछे छोड़ दिया है। उस समय क्रायोजेनिक अपर स्टेज में खराबी के कारण भारत का सपना अधूरा रह गया था। पांच साल बाद, GSLV-F17 ने उसी लक्ष्य को हासिल कर भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की विश्वसनीयता को फिर से बहाल कर दिया है।
EOS-05 की सबसे बड़ी ताकत इसकी ऑर्बिटल पोजिशन है। 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित यह सैटेलाइट किसी भी इलाके पर लगातार नजर रख सकेगा, जो साधारण अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स नहीं कर पाते।
यह तकनीक चक्रवात, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ कृषि और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। रणनीतिक दृष्टि से देखें तो सीमावर्ती इलाकों और समुद्री क्षेत्रों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर इसकी पैनी नजर दुश्मनों के लिए सिरदर्द बन सकती है।
जनवरी 2026 में PSLV-C62 की विफलता ने इसरो की साख पर सवाल खड़े किए थे। ऐसे नाजुक समय में GSLV-F17 की सफलता ने न केवल मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाई है, बल्कि यह भी साबित किया कि भारत किसी भी एक लॉन्च सिस्टम की नाकामी से रुकने वाला नहीं है।
अब इसरो की नजरें अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन पर टिकी हैं। नॉटी बॉय के इस सफल कारनामे ने साफ कर दिया है कि भारतीय वैज्ञानिक अब किसी भी मुश्किल दौर से बाहर निकलने का हुनर बखूबी जानते हैं। इस बार नॉटी बॉय ने कोई शरारत नहीं की, बल्कि भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।
Another giant leap for India in Space!
— Dr Jitendra Singh (@DrJitendraSingh) September 3, 2026
Kudos to Team @isro on the successful launch of GSLV-F17/EOS-05.
EOS-05 is a state-of-the-art Earth Observation satellite and India’s first imaging satellite from Geosynchronous Orbit, enabling advanced imaging across visible, infrared,… pic.twitter.com/1HHJrWM7ze
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