काले धन का सफेद खेल : फर्जी कंपनियों और हवाला नेटवर्क का बड़ा खुलासा
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फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की एक हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग के खतरनाक जाल को उजागर किया है। इस रिपोर्ट में भारतीय जांच एजेंसियों द्वारा किए गए उन खुलासों को प्रमुखता दी गई है, जिन्होंने अवैध धन को सफेद करने के अत्याधुनिक और जटिल तरीकों की पोल खोल दी है।

कैसे काम करता है फर्जी व्यापार का सिंडिकेट?

FATF की रिपोर्ट में भारत से जुड़ा एक केस स्टडी मार्च 2022 का है। इसमें एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ हुआ, जो पूरी तरह से शेल (फर्जी) कंपनियों पर टिका था। ये कंपनियां कागजों पर तो थीं, लेकिन इनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। अपराधी डमी लोगों या चोरी किए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल कर इन्हें खड़ा करते थे।

ये गिरोह आयात-निर्यात के दस्तावेजों में हेरफेर करते थे। सामान की कीमत कम दिखाकर विदेश में बड़ी राशि का भुगतान बकाया रखा जाता था। इसके बाद, सर्कुलर ट्रेड के जरिए सामान को तीसरे देशों में घुमाया जाता था, जिससे पैसे का असली स्रोत और ठिकाना पूरी तरह छिप जाता था।

ऑनलाइन जुआ और डिजिटल हवाला का नया जाल

रिपोर्ट का दूसरा अहम हिस्सा अवैध ऑनलाइन जुआ साइटों से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि जुए से कमाई गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए UPI, नेट बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट का दुरुपयोग किया गया।

अपराधियों ने म्यूल अकाउंट्स (चोरी की पहचान से खुले खाते) का इस्तेमाल कर पहले पैसे को नकदी में बदला। फिर इस नकदी को हवाला के जरिए विदेश भेजा गया और अंत में वही पैसा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से वैध विदेशी निवेश के रूप में भारत वापस लाया गया।

तकनीक बनी मनी लॉन्ड्रिंग का नया हथियार

दुनिया भर के 80 फीसदी देशों ने FATF को रिपोर्ट दी है कि हवाला और गैर-पंजीकृत बैंकिंग प्रणाली उनके सामने बड़ी चुनौती बन गई है। भारत के संदर्भ में डिजिटल हवाला का चलन तेजी से बढ़ा है।

अब ये ऑपरेटर WhatsApp और Telegram जैसे एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अपना नेटवर्क चला रहे हैं। FATF ने चेतावनी दी है कि बिना लाइसेंस के हवाला सेवाएं चलाना न केवल गंभीर अपराध है, बल्कि यह संगठित अपराधों और आतंकवाद के वित्तपोषण का भी मुख्य जरिया बन चुका है।

वैश्विक चिंता का विषय

FATF की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले अब पारंपरिक बैंकिंग से हटकर डिजिटल और अनौपचारिक रास्तों को अपना रहे हैं। दुनिया भर की एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि अपराधी तकनीकी विकास और दस्तावेजों में हेरफेर का लाभ उठाकर जांच निकायों को लगातार चकमा दे रहे हैं।

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