नेपाल इन दिनों दशकों की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। बाढ़ और भूस्खलन ने गांवों, सड़कों और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया है। इस संकट के बीच, नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी एक मसीहा बनकर उभरी हैं। उन्होंने महज छह दिनों में करीब 100 बचाव अभियान पूरे कर सैकड़ों जिंदगियां बचाई हैं।
हिमालय की संकरी घाटियों में उड़ान भरना किसी चुनौती से कम नहीं है। तिमुरे जैसे इलाकों में जमीन पूरी तरह से अस्थिर है। कैप्टन प्रिया बताती हैं कि ऊपर से जो जमीन ठोस दिखती है, लैंडिंग के बाद वह अक्सर गहरे कीचड़ में बदल जाती है। हेलीकॉप्टर के धंसने के डर से पायलटों को इंजन बंद करने के बजाय चालू रखना पड़ता है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत उड़ान भरी जा सके।
बचाव अभियान के दौरान आसमान में स्थिति और भी जटिल थी। एक संकरी घाटी में करीब 20 हेलीकॉप्टर एक साथ काम कर रहे थे। रेडियो पर लगातार संवाद, अन्य विमानों की स्थिति पर नजर और नेविगेशन को संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण था। प्रिया कहती हैं कि एक सेकंड की चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी, लेकिन सभी पायलटों ने अद्भुत सामंजस्य दिखाया।
कैप्टन प्रिया ने हवाई दृश्य से जो तबाही देखी, वह उनके लिए झकझोर देने वाली थी। उनके अनुसार, यह आपदा 2015 के भूकंप से भी अधिक विनाशकारी प्रतीत हो रही है। लोग मलबे में दबे थे और शव चारों ओर बिखरे पड़े थे। पहले दो दिनों के भीतर ही तिमुरे क्षेत्र से 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। पांच बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।
इतनी बड़ी तबाही के बीच, उन लोगों की मुस्कान कैप्टन प्रिया की सबसे बड़ी प्रेरणा है जिन्हें वे बचाकर लाती हैं। उन्होंने उन लोगों को खोजने की कोशिश भी की जो आपदा में अपनों से बिछड़ गए थे। वह न केवल जीवित लोगों को निकाल रही हैं, बल्कि मृतकों के शवों को भी सम्मान के साथ वापस लाने का कठिन कार्य कर रही हैं, जिसके लिए उन्हें शव ले जाने वाले बैगों की निरंतर आवश्यकता पड़ रही है।
प्रिया अधिकारी का करियर किसी मिसाल से कम नहीं है। पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई के बाद उन्होंने केबिन क्रू के रूप में शुरुआत की थी। एक उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर के प्रति उनके लगाव ने उन्हें पेशेवर पायलट बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने फिलीपींस में प्रशिक्षण लिया और 2017 में नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन बनीं। आज वे 6,200 मीटर की ऊंचाई तक बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं।
इस संकट में कैप्टन प्रिया ने साबित कर दिया है कि साहस और सही प्रशिक्षण से नामुमकिन को भी मुमकिन बनाया जा सकता है। उनकी यह निस्वार्थ सेवा नेपाल के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज की जाएगी।
Nepal’s first female Helicopter captain Priya Adhikari during rescue mission. She has flown over 100 rescue flights after massive flood. 🙏🇳🇵#nepal #highlight #everyoneシ゚ #follower pic.twitter.com/HVK3bqjdUj
— Nirmal Prasai🇳🇵 (@NirmalPrasai5) September 2, 2026
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