आज 3 सितंबर 2026 को भारत की स्टार फ्रीस्टाइल रेसलर साक्षी मलिक अपना 34वां जन्मदिन मना रही हैं। एक साधारण से गांव से निकलकर ओलंपिक पदक तक का उनका सफर न केवल खेलों की दुनिया के लिए, बल्कि भारतीय महिलाओं के लिए एक मशाल की तरह है।
साक्षी का जन्म 1992 में हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गांव में हुआ था। पिता सुखबीर मलिक बस कंडक्टर थे और मां सुदेश मलिक हेल्थ क्लिनिक में सुपरवाइजर। परिवार भले ही सामान्य था, लेकिन उनके दादा बदलू राम, जो खुद एक पहलवान थे, से मिली प्रेरणा ने साक्षी के भीतर बचपन में ही खेल के प्रति जुनून जगा दिया था।
2000 के दशक की शुरुआत में हरियाणा के एक गांव में लड़की का कुश्ती लड़ना बड़े साहस का काम था। जब 12 साल की उम्र में साक्षी ने छोटू राम स्टेडियम में ट्रेनिंग शुरू की, तो समाज ने उन पर और उनके कोच ईश्वर दहिया पर उंगलियां उठाईं।
लोगों ने उनके माता-पिता को डराया कि शॉर्ट्स पहनने और लड़कों के साथ कुश्ती करने से उनकी शादी में दिक्कत आएगी। लेकिन परिवार ने समाज की रूढ़िवादी सोच को ठुकराकर अपनी बेटी के सपनों को ढाल बनाया।
साक्षी के करियर का सबसे यादगार पल 17 अगस्त 2016 की रात रियो ओलंपिक में आया। ब्रॉन्ज मेडल मैच में वो किर्गिस्तान की खिलाड़ी से 0-5 से पीछे चल रही थीं। लेकिन अंतिम कुछ सेकंडों में उन्होंने जैसी वापसी की और 8-5 से मुकाबला जीता, उसने पूरे भारत को झूमने पर मजबूर कर दिया। वह ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं।
साक्षी की निजी जिंदगी भी प्रेरणादायक है। उनकी मुलाकात साथी पहलवान सत्यव्रत कादियान से ग्लोबल टूर्नामेंट्स के दौरान हुई। यह दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई और 2017 में दोनों विवाह के बंधन में बंध गए। 2024 में इस जोड़े के घर बेटी योशीदा का जन्म हुआ, जिसका नाम उन्होंने जापानी रेसलिंग आइकन साओरी योशिदा के सम्मान में रखा है।
दिसंबर 2023 में प्रतिस्पर्धी कुश्ती से संन्यास लेने के बाद भी साक्षी रुकी नहीं हैं। खेल रत्न और पद्म श्री से सम्मानित साक्षी अब एथलीटों की सुरक्षा और महिलाओं के अधिकारों के लिए एक प्रमुख आवाज बन गई हैं। उनकी आत्मकथा विटनेस (2024) उनके संघर्षों का जीवंत दस्तावेज है।
टाइम मैगजीन की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल होकर उन्होंने साबित कर दिया है कि एक एथलीट का प्रभाव सिर्फ मैट तक सीमित नहीं रहता। आज, अपने 34वें जन्मदिन पर साक्षी मलिक एक चैंपियन के साथ-साथ एक साहसी महिला आइकन के रूप में लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।
*The fight that brought home an Olympic medal.
— Olympic Khel ™ (@OlympicKhel) September 3, 2026
On Sakshi Malik&dhapos;s birthday, relive the historic moment that secured her bronze at Rio 2016. pic.twitter.com/9qQ15yUVf2
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