दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में इलाज के नाम पर एक मासूम की जान चली गई। 15 वर्षीय तन्वी, जो जन्मजात दिल की बीमारी से जूझ रही थी, 12 साल तक ऑपरेशन की तारीख का इंतज़ार करती रही, लेकिन उसे महज़ तारीख पर तारीख ही नसीब हुई। अब जब बच्ची की मौत हो गई है, तो अस्पताल प्रशासन ने जांच के नाम पर खानापूर्ति शुरू कर दी है।
12 साल का दर्दनाक इंतज़ार तन्वी के पिता मुकेश परियारानी के अनुसार, वे अपनी बेटी को साल 2012 में पहली बार एम्स लाए थे। तब वह महज दो साल की थी। जांच में उसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) और पल्मोनरी एट्रेसिया जैसी गंभीर बीमारी निकली। परिवार का आरोप है कि 12 वर्षों में उन्हें कई बार सर्जरी का भरोसा दिया गया और तारीखें बदली गईं, लेकिन ऑपरेशन कभी नहीं हुआ।
घूसखोरी और लापरवाही के आरोप परिजनों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पिता का आरोप है कि सर्जरी को समय पर करवाने के लिए उन्होंने एक व्यक्ति को 30 हजार रुपये भी दिए थे, लेकिन उसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की लेटलतीफी के चलते तन्वी की जान नहीं बचाई जा सकी। आरोप है कि बार-बार चक्कर कटवाने के बावजूद अस्पताल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
एम्स का क्या है रुख? तन्वी की मौत के बाद मामला तूल पकड़ा, तो एम्स प्रशासन ने एक जांच समिति का गठन किया है। अस्पताल का तर्क है कि 2017 की रिपोर्ट में तन्वी की स्थिति सर्जरी के लायक नहीं थी। अस्पताल का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और क्लीनिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। फिलहाल, अस्पताल का मानना है कि किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
जांच के दायरे में पूरी फाइल अब यह कमेटी तन्वी के 12 साल के इलाज, उसके मेडिकल रिकॉर्ड और उन सभी परिस्थितियों की समीक्षा करेगी, जिनकी वजह से सर्जरी नहीं हो सकी। सवाल यह है कि यदि 12 साल से बच्ची इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर काट रही थी, तो उसे समय पर सही परामर्श क्यों नहीं मिला? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या संसाधनों की कमी? जवाब का इंतज़ार अब एक मृत बच्ची के परिवार को है।
AIIMS New Delhi Constitutes Committee to Review Clinical Course and Circumstances in Case of Patient Tanvi. pic.twitter.com/RUGRrrzFf9
— AIIMS, New Delhi 🇮🇳 (@aiims_newdelhi) September 2, 2026
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