क्या मतदाता सूची में हेरफेर? खरगे के वोट चोरी के आरोपों पर गरमाई सियासत
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा बीजेपी पर लगाए गए वोट चोरी के गंभीर आरोपों ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। खरगे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उसे भाजपा की कुर्सी बचाओ आयोग तक कह दिया है।

खरगे के निशाने पर बीजेपी और चुनाव आयोग बीते 1 सितंबर को खरगे ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि बीजेपी अपनी सुविधानुसार मतदाता सूचियों में छेड़छाड़ कर रही है। उनके अनुसार, जहां चुनाव जीतना आसान है, वहां नए नाम जोड़े जा रहे हैं, जबकि विपक्ष के प्रभाव वाले क्षेत्रों में जानबूझकर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।

खरगे ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, तेलंगाना और कर्नाटक में मतदाता सूची की विसंगतियों को लेकर चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा किया है।

मनोज झा का तीखा प्रहार: चोरी कहें या डकैती? इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के वरिष्ठ नेता और सांसद मनोज झा ने विपक्षी खेमे को और मजबूत कर दिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव के समय लाखों लोगों को अयोग्य करार दिया गया, जिन्हें अब वापस जोड़ा जा रहा है, लेकिन वे मतदान के अधिकार से वंचित रह गए।

झा ने तल्ख लहजे में पूछा, इसे चोरी कहा जाए या डकैती? जनता को यह तय करना है कि इस लोकतंत्र विरोधी कृत्य का गुनहगार कौन है?

चुप्पी का खामियाजा सभी को भुगतना होगा मनोज झा ने उन लोगों को चेतावनी दी जो इस पूरे मामले पर खामोश हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग आज इस हेरफेर से मिलने वाले फायदे पर मन ही मन खुश हो रहे हैं, उन्हें भविष्य में इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने साफ कहा कि लोकतंत्र के इन गुनाहगारों को सजा जरूर मिलेगी।

विपक्ष का हमला जारी खरगे और मनोज झा के बयानों से साफ है कि आगामी चुनाव से पहले विपक्ष ने मतदाता सूची के मुद्दे को अपना मुख्य हथियार बना लिया है। खरगे का दावा है कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं की संख्या में हुआ बदलाव और बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।

अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या सफाई देता है, क्योंकि विपक्ष का यह हमला आयोग की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है।

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