1600 बच्चों के मसीहा बने प्रिंसिपल: नेपाल में तबाही के बाद अब भारत फिर से बनाएगा यह स्कूल
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नेपाल के नुवाकोट जिले में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच एक प्रिंसिपल की सूझबूझ ने 1600 से अधिक बच्चों की जिंदगी बचा ली। त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी का यह साहसिक कदम अब दो देशों की दोस्ती की नई मिसाल बन गया है। भारत ने अब इस स्कूल के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी लेने का भरोसा दिया है।

सिर्फ 14 मिनट थे पास 26 अगस्त की सुबह जब रासुवा से बाढ़ की चेतावनी मिली, तो प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी के पास बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए महज 14 मिनट का समय था। उन्होंने बिना देरी किए स्कूल की घंटी बजाई, कक्षाएं बंद कराईं और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना शुरू किया।

उनकी तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आखिरी बस के पुल पार करने के ठीक 14 मिनट बाद ही बाढ़ की तेज लहरों ने पूरे स्कूल को अपनी चपेट में ले लिया। वहां अब सिर्फ नदी का तल बचा है।

इंसानियत और कर्तव्य की मिसाल राजेंद्र दवाड़ी इसी स्कूल के पुराने छात्र भी रहे हैं। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ को बाहर निकाला। हालांकि, इस त्रासदी में स्कूल के एक कर्मचारी समेत कई लोग लापता भी हुए। दवाड़ी का कहना है कि इमारत तो चली गई, लेकिन भविष्य यानी बच्चों को बचा लेना ही उनकी सबसे बड़ी जीत है।

भारत और स्कूल का 70 साल पुराना रिश्ता इस स्कूल का भारत से गहरा नाता रहा है। 1950 के दशक में भारत की सहायता से ही इस स्कूल की नींव रखी गई थी। इतना ही नहीं, 2022 में भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत इसका नया आधुनिक भवन तैयार किया गया था। इस स्कूल का डिज़ाइन भी एक भारतीय इंजीनियर ने तैयार किया था।

पुनर्निर्माण में फिर साथ खड़ा भारत बाढ़ में स्कूल पूरी तरह तबाह होने के बाद, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने 1 सितंबर को प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी से मुलाकात की। राजदूत ने स्पष्ट किया कि भारत इस स्कूल के पुनर्निर्माण में हर संभव सहयोग करेगा। यह भारत और नेपाल के बीच मजबूत मानवीय और कूटनीतिक रिश्तों को एक बार फिर दर्शाता है।

त्रिशूली घाटी में भारी तबाही 26 अगस्त को आई इस बाढ़ ने न केवल स्कूलों को बल्कि सड़कों, पुलों और सैकड़ों घरों को जमींदोज कर दिया। आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता हैं। ऐसे में भारत का यह सहयोग नेपाल के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

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