आठवें वेतन आयोग के गठन और इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में चिंता बढ़ी हुई थी। विशेष रूप से 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए 69 लाख पेंशनर्स इस बात को लेकर आशंकित थे कि क्या उनकी पेंशन में संशोधन होगा। अब इस मामले में डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए पेंशनर्स के पक्ष में कदम उठाया है।
ऑल इंडिया डिफेंस इम्प्लॉइज फेडरेशन, पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन और रेलवे मेल सर्विस समेत कई बड़े कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की थी कि आयोग के ToR में संशोधन कर पूर्व पेंशनर्स को भी दायरे में लाया जाए।
अब DoPT ने व्यय विभाग (Department of Expenditure) को पत्र लिखकर इन संगठनों की मांगों का समर्थन किया है। इस समर्थन ने पेंशनर्स की उम्मीदों को नई ताकत दी है। इससे पहले नेशनल काउंसिल (JCM) के जनरल सेक्रेटरी शिवगोपाल मिश्रा भी इस मुद्दे पर सरकार को अपना पक्ष रख चुके हैं।
अक्सर सवाल उठता है कि क्या वेतन आयोग के नियमों (ToR) में बीच में बदलाव मुमकिन है? इतिहास गवाह है कि सरकार जरूरत पड़ने पर नियमों में संशोधन करती रही है:
इतिहास के पन्नों को देखें तो स्पष्ट है कि चौथे से सातवें वेतन आयोग तक लगातार शर्तों में बदलाव किए गए हैं। DoPT द्वारा मिल रहे समर्थन के बाद अब गेंद पूरी तरह से वित्त मंत्रालय के पाले में है।
अगर सरकार वित्त मंत्रालय के स्तर पर ToR में संशोधन करने का निर्णय लेती है, तो यह 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए लाखों पेंशनर्स के लिए बड़ी जीत होगी। इससे उनका भविष्य सुरक्षित होने के साथ ही पेंशन के रिवीजन का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
#8thPayCommission पर महत्वपूर्ण बयान...@AIRF_DELHI pic.twitter.com/aquglLlB8C
— Shiva Gopal Mishra (@ShivaGopalMish1) August 29, 2026
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