DGP के सामने खुली पुलिस जांच की पोल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा - हमें जमीनी हकीकत का पता है
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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की गुणवत्ता पर कड़ा प्रहार किया है। मंगलवार को डीजीपी (DGP) की पेशी के दौरान अदालत ने पुलिस के दावों और हकीकत के अंतर को उजागर करते हुए सख्त टिप्पणियां कीं।

आंकड़ों के दावों पर कोर्ट का तंज सुनवाई के दौरान डीजीपी ने पुलिस के कनविक्शन रेट (दोषसिद्धि दर) के आंकड़े पेश किए। इस पर जस्टिस समीर जैन ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत के सामने अक्सर ऐसी फाइलें आती हैं, जिनमें जांच बेहद खराब तरीके से की गई होती है। उन्होंने साफ लहजे में कहा, आप कनविक्शन रेट की बात कर रहे हैं, लेकिन हम हाईकोर्ट के जज हैं और हम जमीनी हकीकत जानते हैं।

CCTV फुटेज और रिकॉर्ड पर सवाल अदालत ने पुलिस के रिकॉर्ड रखने के तरीके पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने जिक्र किया कि कई बार हलफनामों में दावा किया जाता है कि सभी सबूत और सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं, लेकिन जब अदालत वास्तविक रिकॉर्ड मांगती है, तो फुटेज गायब मिलती है। यह टिप्पणी पुलिस की साख और पारदर्शी जांच पर बड़े सवाल खड़े करती है।

पर्सनल लिबर्टी के मामलों में लापरवाही व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) से जुड़े मामलों में पुलिस की सुस्ती पर भी कोर्ट नाराज दिखा। जस्टिस जैन ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस निर्देश लेने में देरी करती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तीन दिन का समय पर्याप्त है, 10 दिन का पुराना ढर्रा अब नहीं चलेगा।

डीजीपी का भरोसा और कोर्ट की नसीहत हालात को भांपते हुए डीजीपी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि व्यवस्था में सुधार के लिए विशेष समितियां बनाई गई हैं और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने संयमित जवाब देते हुए कहा कि पुलिस विभाग में सभी सक्षम अधिकारी तैनात हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनका काम केवल समस्याएं बताना है, जबकि समाधान ढूंढना और उसे लागू करना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है।

पुलिसिंग में सुधार की सख्त जरूरत हाईकोर्ट की इन टिप्पणियों ने यह साफ कर दिया है कि पुलिस की जांच प्रक्रिया में अब औपचारिकताएं नहीं, बल्कि गुणवत्ता और जवाबदेही की मांग की जाएगी। डीजीपी के सामने हुई यह तीखी बहस पुलिस विभाग के लिए एक कड़ा संदेश है कि अदालत अब आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय ठोस नतीजों पर नजर रखेगी।

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