मोदी-पुतिन-शी को परोसा गया बोर्सोक ! खानाबदोशों की रसोई से विश्व मंच तक कैसे पहुंचा यह खास व्यंजन?
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बिश्केक में आयोजित SCO समिट के दौरान दुनिया के दिग्गज नेताओं का स्वागत एक बेहद खास और पारंपरिक अंदाज में किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत तमाम विदेशी मेहमानों को किर्गिस्तान की मशहूर डिश बोर्सोक (Boorsok) परोसी गई।

दिखने में लिट्टी जैसा, स्वाद में अनोखा पहली नजर में बोर्सोक को देखकर भारतीयों को अपनी मशहूर लिट्टी या नमक पारे की याद आ सकती है। यह किर्गिस्तान का एक पारंपरिक व्यंजन है, जिसका गहरा नाता मध्य एशिया की खानाबदोश संस्कृति से है। यह डिश न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा इतिहास भी छिपा है।

खानाबदोशों की मजबूरी बनी खास डिश ऐतिहासिक रूप से किर्गिज लोग खानाबदोश जीवन जीते थे। उन्हें ऐसे भोजन की आवश्यकता थी जिसे जल्दी तैयार किया जा सके, जिसकी लागत कम हो और जिसे लंबे सफर के दौरान लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। पुराने समय में इसे जानवरों की चर्बी में तला जाता था, लेकिन अब इसे तेल में फ्राई किया जाता है।

कैसे तैयार होता है बोर्सोक? बोर्सोक बनाने के लिए आटे या मैदे को गूंथा जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए कई बार इसमें पानी की जगह दूध, थोड़ा मक्खन और चीनी का भी इस्तेमाल होता है। आटे को फूलने के लिए छोड़ने के बाद, इसकी मोटी लोई बेलकर उसे छोटे चौकोर या तिकोने टुकड़ों में काटा जाता है। अंत में इन्हें सुनहरा होने तक तेल में तला जाता है। इसे चाय, शहद, जैम या कायमक (गाढ़ी क्रीम) के साथ परोसा जाता है।

क्षेत्रीय पहचान का प्रतीक यह व्यंजन सिर्फ किर्गिस्तान तक सीमित नहीं है। कजाकिस्तान में इसे बाउर्साक , मंगोलिया और आसपास के अन्य मध्य एशियाई देशों में भी इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। हर क्षेत्र और परिवार में इसकी रेसिपी थोड़ी बदल जाती है; कहीं यह नमकीन होता है, तो कहीं हल्का मीठा।

किर्गिस्तान की युर्ट संस्कृति बोर्सोक का संबंध किर्गिज लोगों के पारंपरिक घरों यानी युर्ट से भी है। लकड़ी के ढांचे पर बना यह गोल तंबू आसानी से लगाया और हटाया जा सकता था, जो खानाबदोश जीवन के लिए बेहद मुफीद था। हालांकि आज आधुनिक किर्गिस्तान में लोग शहरों में बस गए हैं, लेकिन गर्मि‍यों में पहाड़ी चरागाहों की ओर जाने वाली मौसमी पशुपालन की परंपरा आज भी जिंदा है।

तमाम वैश्विक उठापटक के बीच, SCO समिट में परोसा गया यह पारंपरिक व्यंजन मध्य एशिया की समृद्ध संस्कृति और मेहमाननवाजी की एक अनूठी झलक पेश कर गया।

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