नेपाल में तबाही के पीछे ड्रैगन का हाथ? बाढ़ से 919 मौतें, चीन पर लगे गंभीर आरोप
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नेपाल इस वक्त सदी की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आए जलजले ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 919 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7000 से अधिक लोग लापता हैं। इस त्रासदी ने अब नेपाल और चीन के बीच कूटनीतिक तनाव को भी जन्म दे दिया है।

आपदा की चेतावनी में चीन की लापरवाही ?

नेपाल सरकार ने चीन पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। काठमांडू का कहना है कि चीन ने ग्लेशियरों की स्थिति और नदियों के जलस्तर से जुड़ी खुफिया और सटीक जानकारी समय पर साझा नहीं की। नेपाल के अनुसार, उन्होंने चीन से डेटा मांगा था, लेकिन ड्रैगन ने केवल सामान्य बारिश का पूर्वानुमान भेजकर पल्ला झाड़ लिया। नेपाल अब भारत की तर्ज पर चीन के साथ भी रियल-टाइम डेटा शेयरिंग समझौता चाहता है ताकि ऐसी तबाही को रोका जा सके।

ड्रैगन ने आरोपों को किया खारिज

दूसरी ओर, चीन ने नेपाल के सभी दावों को बेबुनियाद करार दिया है। चीनी दूतावास का तर्क है कि हिमालय का सीमावर्ती क्षेत्र भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम है, जिससे निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है। चीन का दावा है कि उसने हादसे से 12 दिन पहले ही ईमेल के जरिए भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट जारी कर दिया था।

सड़कों पर कब्रें, अपनों की तलाश में बिलखते लोग

तबाही का आलम यह है कि बड़ी संख्या में शवों की पहचान करना नामुमकिन हो गया है। कई शव लंबे समय तक पानी में रहने के कारण खराब हो चुके हैं। प्रशासन ने शवों को दफनाने के लिए सैकड़ों कब्रें तैयार की हैं, जिनमें से 196 को दफनाया भी जा चुका है। हजारों परिवार अभी भी अपने लापता परिजनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।

20 हजार से ज्यादा जवान रेस्क्यू में जुटे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके लिए 394 हवाई उड़ानें भरी गईं। ज़मीनी स्तर पर नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र बल के 20,618 जवान दिन-रात राहत कार्यों में जुटे हैं।

झील फटने का खतरा फिलहाल टला

राहत की बात यह है कि चीन-नेपाल सीमा पर ग्लेशियर फटने से बनी बैरियर झील का पानी प्राकृतिक बहाव से धीरे-धीरे निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील में जमा करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी निकल चुका है, जिससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आने का सबसे बड़ा खतरा फिलहाल टल गया है।

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