2027 की बिसात: मायावती ने फूंका चुनावी बिगुल, लखनऊ में मंथन के बीच नए चेहरे की एंट्री
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लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राज्य कार्यालय में सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। पार्टी अध्यक्ष मायावती की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव है। बैठक में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों, मंडल स्तर के पदाधिकारियों और विधानसभा प्रभारियों समेत 600 से अधिक नेता शामिल हुए हैं।

चुनावी रणनीति और बूथ स्तर पर फोकस बैठक का मुख्य एजेंडा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना है। मायावती ने आगामी चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों की समीक्षा की और चुनावी रणनीतियों को लेकर सख्त निर्देश दिए। इसमें विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने और संभावित प्रत्याशियों के चयन पर विशेष चर्चा की जा रही है। पिछले निर्देशों के पालन और जमीनी फीडबैक पर भी मायावती ने बारीकी से नजर रखी है।

प्रिंस युकेश सिंह की मौजूदगी ने खींचा ध्यान इस बैठक में दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस युकेश सिंह की उपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। उमाशंकर सिंह का 5 अगस्त को ब्रेन कैंसर के कारण निधन हो गया था। युकेश सिंह, जो अब तक अपने पिता की कंपनी में CEO के तौर पर सक्रिय थे, उन्हें अब उनके पिता की राजनीतिक विरासत के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। मायावती ने पहले ही संकेत दिए थे कि यदि परिवार की इच्छा हो, तो उन्हें राजनीति में पूरा सम्मान और अवसर दिया जाएगा।

आकाश आनंद की अनुपस्थिति और आगे की राह पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद इस बैठक में शामिल नहीं हुए। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, वे 3 सितंबर को होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेंगे। फिलहाल, आकाश आनंद का पूरा ध्यान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को सक्रिय करने पर है, जहाँ वे लगातार जनसंपर्क कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।

30 सीटों पर प्रभारियों का ऐलान, बढ़ी सक्रियता बसपा ने चुनावी तैयारियों को रफ्तार देते हुए अब तक 30 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रभारी घोषित कर दिए हैं। इसके साथ ही 50 से अधिक संभावित उम्मीदवारों को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यकर्ता सम्मेलनों के जरिए संगठन में नई ऊर्जा भरने का प्रयास कर रहे हैं।

अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या मायावती अपने पुराने निष्ठावान नेताओं के उत्तराधिकारियों को आगे लाकर 2027 में कुछ नए समीकरण पेश करेंगी।

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