लखनऊ में सनसनीखेज वारदात: कुलदीप सिंह सेंगर के करीबी धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या, नहर में मिला शव
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लखनऊ में महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की निर्मम हत्या कर दी गई है। 29 अगस्त को अगवा किए गए धीरेंद्र का शव 30 अगस्त की शाम को दुबग्गा इलाके में एक नहर के किनारे मिला। उनके सिर और सीने पर गोली के निशान पाए गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि उनकी हत्या बेहद सुनियोजित तरीके से की गई।

कुलदीप सिंह सेंगर से गहरा नाता मृतक धीरेंद्र प्रताप सिंह उन्नाव के चर्चित माखी दुष्कर्म मामले से सीधे तौर पर जुड़े थे। उन्हें पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के कट्टर समर्थकों में गिना जाता था। 2017 में पीड़िता के चाचा के खिलाफ हुई कथित वसूली मामले में वे गवाह भी थे। हालांकि, वे खुद को भाजपा नेता बताते थे, लेकिन पार्टी की ओर से उनके पास कोई आधिकारिक पद होने की पुष्टि नहीं हुई है।

गायब होने से लेकर बरामदगी तक का घटनाक्रम धीरेंद्र 29 अगस्त की शाम अपनी फॉर्च्यूनर कार से घर से निकले थे। पत्नी ममता सिंह के अनुसार, जब उनसे संपर्क नहीं हुआ तो ड्राइवर से पूछताछ की गई, जिसने पहले उन्हें मॉल में और बाद में उन्नाव के परिचितों के साथ होने की झूठी जानकारी दी। आखिरकार, पुलिस ने 30 अगस्त को उनका शव बरामद किया। पुलिस को संदेह है कि उनकी हत्या उनकी अपनी गाड़ी के अंदर ही की गई थी।

मुख्य संदिग्ध: ड्राइवर और जमीन विवाद पुलिस ने इस मामले में ड्राइवर समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है। प्राथमिक जांच में हत्या की सबसे बड़ी वजह उन्नाव में 50 करोड़ रुपये की जमीन को लेकर चल रहा विवाद बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि धीरेंद्र ने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक शिकायती पत्र भी सौंपा था, जिसमें अवैध कब्जों और जमीन से संबंधित अनियमितताओं का जिक्र था।

नाम का भ्रम: हिंदू युवा वाहिनी नेता ने दी सफाई इस हत्याकांड के बाद एक बड़ा भ्रम तब पैदा हुआ जब सोशल मीडिया पर उन्हें हिंदू युवा वाहिनी का पदाधिकारी बताया गया। हालांकि, इसी नाम के हिंदू युवा वाहिनी के असली पदाधिकारी ने वीडियो जारी कर स्पष्ट किया कि वे जीवित हैं और यह पहचान का मामला भ्रम के कारण हुआ। खबरों में गलत फोटो के इस्तेमाल से भारी confusión की स्थिति पैदा हो गई थी।

कौन थे धीरेंद्र प्रताप सिंह? मूल रूप से उन्नाव के राजेपुर गांव के रहने वाले धीरेंद्र प्रताप सिंह पिछले कई वर्षों से लखनऊ में रह रहे थे। वे प्रॉपर्टी डीलिंग, ट्रांसपोर्ट और सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे। वे तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। फिलहाल, फोरेंसिक टीम उनकी बरामद फॉर्च्यूनर और घटनास्थल की बारीकी से जांच कर रही है ताकि हत्याकांड से जुड़े अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

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