नेपाल की भीषण बाढ़ में कैसे अडिग रहा यह ग्रीन हाउस ? इंजीनियरिंग का वो चमत्कार जिसने सबको चौंकाया
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नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े-बड़े पुलों और बहुमंजिला इमारतों को तास के पत्तों की तरह ढहा दिया। लेकिन, इस तबाही के बीच एक हरे रंग का दो मंजिला घर बिना खरोंच के खड़ा रहा। चीन और तिब्बत बॉर्डर के पास स्थित इस घर की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

इंजीनियरिंग ने बचाई जान विशेषज्ञों के मुताबिक, इस घर की मजबूती के पीछे की मुख्य वजह इसकी स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग है। इस घर को एक मजबूत मोमेंट-रेजिस्टिंग फ्रेम (Moment-resisting frame) तकनीक से बनाया गया है। इसमें आरसी (RCC) कॉलम और बीम का कनेक्शन इतना सटीक है कि यह मलबे के साथ बहकर आने वाले भारी दबाव को आसानी से झेल गया।

क्यों नहीं हिला घर का ढांचा? इस घर की नींव को बहुत गहरा और मजबूत बनाया गया था। इसमें डीप एंकरिंग और स्ट्रक्चरल निरंतरता का पालन किया गया है। जब बाढ़ का मलबा घर से टकराया, तो नींव में लगी पाइल्स और जमीन में एंड-बेयरिंग ने पार्श्व बलों (Lateral forces) को प्रतिरोध दिया। यह घर किसी लोहे के पिंजरे की तरह कॉलम और बीम से आपस में मजबूती से गुंथा हुआ था, जिसने इसे गिरने नहीं दिया।

मानकों का पालन ही सुरक्षा की गारंटी इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी घर को स्ट्रक्चरल कोड (जैसे IS 456 या नेपाल का NBC मानक) के अनुसार डिजाइन किया जाए और निर्माण से पहले जियोटेक्निकल जांच की जाए, तो ऐसी आपदाओं में जान-माल का नुकसान न्यूनतम हो सकता है। यह घर इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि सही निर्माण तकनीक ही आपदा में जीवन रक्षक बनती है।

नेपाल और तिब्बत में तबाही का मंजर नेपाल में आई इस फ्लैश फ्लड की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। रविवार तक मरने वालों का आंकड़ा 734 तक पहुंच चुका है, जबकि करीब 2500 लोग अभी भी लापता हैं। राहत कार्यों में 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ का असर नेपाल से तिब्बत तक फैला है। तिब्बत में भी 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। लापता लोगों में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय और 15 ब्रिटिश नागरिक भी हैं। फिलहाल, बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन जारी है।

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