मोहन भागवत के न्यूयॉर्क वाले बयान पर कपिल सिब्बल का पलटवार, पूछा- दिल्ली में यह भावना कहां गायब हो जाती है?
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न्यूज डेस्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका के न्यूयॉर्क में दिए गए बयान पर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भागवत के बयान को दोहरा मापदंड करार देते हुए उन पर तीखा हमला बोला है।

क्या राहुल गांधी की भाषा बोल रहे हैं भागवत? सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा कि न्यूयॉर्क में भागवत का यह कहना कि भारत एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और भावना रखता है , हैरान करने वाला है। उन्होंने सवाल किया, क्या यह मोहन भागवत बोल रहे थे या राहुल गांधी? क्योंकि यही बातें तो राहुल गांधी हमेशा कहते रहते हैं।

न्यूयॉर्क और दिल्ली में अलग-अलग स्टैंड सिब्बल ने सीधे शब्दों में कहा कि भागवत का लहजा विदेश में अलग और भारत में अलग होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भागवत न्यूयॉर्क में होते हैं, तो उन्हें भारत में भाईचारा नजर आता है, लेकिन दिल्ली लौटते ही वह भावना कहीं खो जाती है।

लिंचिंग और नफरती बयानों पर उठाए सवाल सिब्बल ने भागवत से तीखे सवाल किए। उन्होंने पूछा, जब देश में मॉब लिंचिंग होती है, लोगों को जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया जाता है या श्मशान-हिजाब जैसे मुद्दों पर समाज को बांटा जाता है, तब आपकी वह सहानुभूति कहां चली जाती है? क्या आपने कभी इन घटनाओं की निंदा की?

सरकार को नसीहत दें भागवत सिब्बल ने भागवत को चुनौती दी कि वे केवल विदेश में एकता की बातें न करें। उन्होंने कहा, जब आप वापस दिल्ली या नागपुर लौटें, तो इस सरकार से कहें कि भारत को एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए। आप एक ऐसी सरकार का समर्थन करते हैं जो समाज के कुछ वर्गों के प्रति संवेदनहीन है, आप इसे कैसे सही ठहरा सकते हैं?

आरएसएस की चुप्पी पर निशाना सिब्बल ने आरएसएस से स्पष्ट रुख रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि संघ को खुलकर कहना चाहिए कि वह समुदायों पर होने वाले हमलों का समर्थन नहीं करता। सिब्बल के अनुसार, जब तक संघ जमीनी स्तर पर नफरत की राजनीति का विरोध नहीं करेगा, तब तक उनकी विदेश में दी गई दलीलें खोखली ही रहेंगी।

गौरतलब है कि मोहन भागवत के इस बयान पर केवल सिब्बल ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी तंज कसा है। विपक्षी नेताओं का साफ कहना है कि कथनी और करनी में अंतर देश की एकता के लिए खतरा है।

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