झारखंड परीक्षा विवाद: CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र, सरकार का सीबीआई बनाम सीआईडी दांव
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झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच हुई छठे दौर की बातचीत भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। छात्र अपनी सबसे प्रमुख मांग—पूरे मामले की CBI से जांच—पर अडिग हैं।

सरकार का दावा: हमने 98% मांगें मान लीं

राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने दावा किया कि सरकार ने छात्रों की 98 फीसदी मांगें स्वीकार कर ली हैं। उन्होंने बताया कि 14वीं JPSC परीक्षा के साथ बैकलॉग 23 और 25 परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि आपराधिक साजिश की जांच 90 दिनों के भीतर CID करेगी और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सजा सुनिश्चित की जाएगी। वित्तीय गड़बड़ी के लिए ED को भी जांच का अनुरोध भेजा जा रहा है।

CGL परीक्षा पर फंसा पेच

छात्र JSSC CGL परीक्षा को भी रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इस पर सरकार का तर्क है कि यह परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई है, इसलिए इसे सीधे रद्द करना संभव नहीं है। हालांकि, सरकार ने निगरानी के लिए हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिसे छात्र अभी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

क्यों नहीं मान रहे छात्र?

आंदोलन के 15वें दिन भी प्रदर्शनकारी छात्र अपनी जिद पर कायम हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि आयोग में बड़े स्तर पर अनियमितता हुई है। प्रदर्शनकारी अर्चना कुमारी और अनीश फातिमा जैसे छात्रों का मानना है कि CID जांच केवल छोटी मछलियों तक सीमित रहेगी, जबकि असली दोषियों (बड़ी मछलियों) को पकड़ने के लिए केवल CBI ही सक्षम है। छात्र नेता राजेश प्रसाद ने आयोग पर RTI के बावजूद उत्तर पुस्तिकाएं न दिखाने का आरोप लगाया और इसे भ्रष्टाचार का बड़ा सुबूत बताया।

विधानसभा घेराव के लिए रांची पुलिस अलर्ट

छात्रों द्वारा सोमवार को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को देखते हुए रांची पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर के SP पारस राणा ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन हिंसा होने पर सख्ती बरती जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस पेंटबॉल गन का उपयोग करेगी, ताकि उपद्रवियों की पहचान कर उन्हें चिन्हित किया जा सके।

क्या है अब आगे?

अब सबकी निगाहें सोमवार को होने वाले प्रदर्शन पर टिकी हैं। सरकार जहां CID और ED की जांच का हवाला देकर मामले को सुलझाना चाहती है, वहीं छात्र किसी भी हाल में केंद्रीय जांच एजेंसी से कम पर समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। फिलहाल, हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है और प्रशासनिक गलियारों में तनाव का माहौल है।

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