#H1: जेन ज़ी को गुमराह किया गया : नीट पेपर लीक के बाद इस्तीफ़ा देने पर धर्मेंद्र प्रधान ने तोड़ी चुप्पी
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पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़ने के दो हफ़्ते बाद पहली बार नीट पेपर लीक मामले और अपने इस्तीफ़े पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। ओडिशा के संबलपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि उस दौरान कुछ लोगों ने देश की नई पीढ़ी यानी जेन ज़ी (Gen Z) को गुमराह करने की कोशिश की थी।

मंत्री पद मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं था प्रधान ने स्पष्ट किया कि इस्तीफ़ा देने का निर्णय उनका व्यक्तिगत था। उन्होंने कहा, मेरे लिए मंत्री पद प्रतिष्ठा का विषय नहीं था। पिछले 10 सालों में 20 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ है, जो भारत का भविष्य हैं। मैंने प्रधानमंत्री से मिलकर स्वयं पद छोड़ने की पेशकश की थी, क्योंकि देशहित युवाओं की आकांक्षाओं से बड़ा है।

विपक्ष का तीखा हमला: इस्तीफ़ा डर का नतीजा प्रधान के इस बयान पर विपक्ष आक्रामक है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि छात्र अच्छी तरह जानते थे कि शिक्षा मंत्रालय की विफलता के पीछे किसकी जवाबदेही थी। वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कटाक्ष करते हुए कहा, इस्तीफ़े के बाद लगा था कि अक्ल ठिकाने आ गई होगी, लेकिन वे अब भी दूसरी दुनिया में जी रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सीधा सवाल किया कि अगर छात्र गुमराह थे, तो फिर पेपर लीक और 21 छात्रों की दुखद मौतों का क्या? उन्होंने इसे सरकार की विफलता छिपाने की कोशिश बताया।

संसद में स्वागत पर भी मचा था बवाल इस्तीफ़े के बाद 27 जुलाई को जब प्रधान संसद पहुंचे, तो बीजेपी और एनडीए सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था। इसे राहुल गांधी ने लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न करार दिया था। उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा था कि यह इस्तीफ़ा नैतिकता के आधार पर नहीं, बल्कि युवाओं के आक्रोश से डरकर दिया गया था।

सीजेपी का आंदोलन और विवाद नीट पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हफ़्तों तक प्रदर्शन चले थे। 20 जुलाई को संसद चलो मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हुई झड़प और लाठीचार्ज के बाद दबाव चरम पर था। हालांकि, बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें किरेन रिजिजू भी शामिल थे, ने प्रधान के इस्तीफ़े को नैतिक ज़िम्मेदारी का उदाहरण बताकर उनका बचाव किया था।

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