ICC वर्ल्ड कप 2027: नए फॉर्मेट का रोमांच और मेजबान होने के बावजूद नामीबिया को क्यों नहीं मिली डायरेक्ट एंट्री?
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आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2027 की मेजबानी इस बार दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया संयुक्त रूप से करेंगे। 4 अक्टूबर से 27 नवंबर तक चलने वाले इस मेगा इवेंट में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। आइए समझते हैं कि इस बार टूर्नामेंट का स्वरूप क्या होगा और मेजबान होने के बावजूद नामीबिया को क्वालीफाई करने के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।

वर्ल्ड कप 2027 का नया और जटिल फॉर्मेट

इस बार टूर्नामेंट नॉकआउट और राउंड-रॉबिन का मिला-जुला रूप होगा। टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी। इसका फॉर्मेट इस प्रकार है:

मेजबान नामीबिया को क्यों नहीं मिली सीधी एंट्री?

अक्सर क्रिकेट वर्ल्ड कप में मेजबान देश को सीधे प्रवेश (ऑटोमैटिक क्वालीफिकेशन) मिलता है। इस नियम के तहत दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे को तो एंट्री मिल गई, लेकिन नामीबिया बाहर रह गया।

इसका मुख्य कारण आईसीसी के नियम हैं। आईसीसी के अनुसार, केवल फुल मेंबर (Full Member) देशों को ही मेजबान होने का लाभ मिलता है। चूंकि नामीबिया अभी तक आईसीसी का पूर्ण सदस्य नहीं है, इसलिए उसे मेजबान होने के बावजूद सीधे क्वालीफिकेशन का हक नहीं मिला। दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे पूर्ण सदस्य हैं, इसलिए उन्हें यह सुविधा दी गई है।

कौन-सी टीमें हुईं क्वालीफाई?

वर्ल्ड कप 2027 के लिए भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और बांग्लादेश ने अपनी जगह पक्की कर ली है। अब केवल एक स्थान बचा है, जिसके लिए वेस्टइंडीज और अन्य दावेदारों के बीच जंग जारी है। जो टीमें रैंकिंग के आधार पर अंदर नहीं आ पाएंगी, उन्हें क्वालीफायर्स खेलकर अपनी जगह बनानी होगी।

12 वेन्यू पर होगा क्रिकेट का महाकुंभ

इस बार कुल 57 मुकाबले 12 अलग-अलग मैदानों पर खेले जाएंगे। इनमें से 8 मैदान दक्षिण अफ्रीका में हैं, 3 जिम्बाब्वे में और केवल 1 मैदान नामीबिया के विंडहोक में स्थित है। यह देखना दिलचस्प होगा कि बिना सीधे प्रवेश के नामीबिया अपनी ही जमीन पर हो रहे इस टूर्नामेंट में अपनी जगह बना पाता है या नहीं।

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